Gold Funds का जलवा, पर 10 साल में Small Caps ने दी ज़बरदस्त टक्कर! जानिए निवेश की पूरी कहानी

MUTUAL-FUNDS
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Gold Funds का जलवा, पर 10 साल में Small Caps ने दी ज़बरदस्त टक्कर! जानिए निवेश की पूरी कहानी
Overview

निवेशकों के लिए इस वक्त Gold Funds की चांदी है, जिन्होंने पिछले एक साल में **59.08%** तक का शानदार रिटर्न दिया है। लेकिन लंबी अवधि की बात करें तो Small Cap Funds ने बाजी मार ली है, जिन्होंने सोने की तुलना में 10 साल में थोड़ा ही सही, पर ज़्यादा कम्पाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल किया है।

सोने की रफ़्तार ने छोड़ा सबको पीछे!

हाल के दिनों में Gold Funds ने अपने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। पिछले एक साल में इन्होंने 59.08% तक का ज़बरदस्त रिटर्न दिया है, जो सोने की पारंपरिक 'सेफ-हेवन' यानी सुरक्षित निवेश वाली इमेज को भी चुनौती दे रहा है। सिर्फ एक साल ही नहीं, 3-साल की अवधि में 24.68% और 5-साल की अवधि में 32.56% का CAGR (कम्पाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट) दर्शाता है कि निवेशक अब सोने को सिर्फ स्थिरता के लिए नहीं, बल्कि ग्रोथ के लिए भी देख रहे हैं। इस दौरान फिजिकल गोल्ड की कीमत भी आसमान छू गई, जो पिछले साल करीब ₹72,000 प्रति 10 ग्राम से बढ़कर ₹1.47 लाख तक पहुंच गई। यह सब तब हुआ जब BSE Sensex और Nifty 50 जैसे बड़े स्टॉक इंडेक्स में 3% से 5% तक की गिरावट आई थी, जो सोने की तुलनात्मक मजबूती को दिखाता है।

10 साल में Small Caps की कमाल की परफॉरमेंस

वहीं, अगर लंबी अवधि की बात करें तो Small Cap Funds का जलवा बरकरार है। ये फंड्स यानी छोटी कंपनियों में निवेश करने वाले फंड्स, सोने को 10 साल की अवधि में पीछे छोड़ने वाले एकमात्र बड़े इक्विटी ग्रुप बन गए हैं। हाई ग्रोथ पोटेंशियल वाली छोटी कंपनियों में निवेश करने वाले इन फंड्स ने पिछले दशक में 15.95% का CAGR हासिल किया, जो सोने के 15.87% CAGR से थोड़ा ही सही, पर ज़्यादा है। यह परफॉरमेंस भारत के इक्विटी बाज़ार में हाई-ग्रोथ स्टॉक्स की लगातार अपील को दिखाता है। जहाँ Gold Funds बाज़ार की उठापटक से सुरक्षा और वैल्यू स्टोर करने का काम करते हैं, वहीं Small Caps कैपिटल ग्रोथ का एक अलग रास्ता दिखाते हैं।

जोखिम और आगे क्या?

Gold Funds की शानदार शॉर्ट-टर्म रिटर्न्स की वजहें ग्लोबल टेंशन, इकोनॉमिक अस्थिरता और महंगाई का डर हैं। पर सवाल ये है कि क्या ये ट्रेंड जारी रहेगा? अगर दुनिया भर के सेंट्रल बैंक्स लंबे समय तक इंटरेस्ट रेट हाई रखते हैं, तो गोल्ड का आकर्षण कम हो सकता है क्योंकि इसमें कोई यील्ड (yield) नहीं मिलता। हाल में सिल्वर (Silver) की भी तेज़ बढ़त ने कमोडिटी मार्केट्स के स्पेकुलेटिव (speculative) साइड को दिखाया है।

वहीं, Small Cap Funds में सबसे बड़ा रिस्क उनकी अपनी वोलेटिलिटी (volatility) है। ये इकोनॉमिक मंदी या बढ़ती ब्याज दरों पर तेज़ी से रिएक्ट कर सकते हैं, जिससे वैल्यू में बड़ी गिरावट आ सकती है। गोल्ड की तरह स्मॉल कैप्स की इकोनॉमिक रिस्क पर प्रतिक्रिया सीधी नहीं होती और रिकवरी में ज़्यादा टाइम लग सकता है। इसके अलावा, गोल्ड ETFs के मुकाबले एक्टिव गोल्ड फंड्स में ज़्यादा फीस लग सकती है।

निवेश की सही रणनीति?

इन मिले-जुले परफॉरमेंस को देखते हुए, अब सवाल ये उठता है कि पोर्टफोलियो में Gold और Stocks (स्टॉक) का सही बैलेंस कैसे बनाएं। मौजूदा ग्लोबल अनिश्चितता और डोमेस्टिक ग्रोथ के बीच, दोनों ही एसेट क्लास का अपना-अपना रोल है। गोल्ड छोटी अवधि की उथल-पुथल में काम आता है, जबकि स्मॉल कैप्स लंबी अवधि में वेल्थ बिल्डिंग के लिए बेहतर हैं।

एक्सपर्ट्स (Experts) की सलाह है कि हाल के बड़े रिटर्न को देखकर किसी भी एसेट में निवेश न करें। अपनी रिस्क लेने की क्षमता और निवेश के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ही फैसला लें। एक बैलेंस्ड अप्रोच (balanced approach), जिसमें गोल्ड स्थिरता और हेजिंग (hedging) के लिए हो और स्मॉल कैप्स ग्रोथ के लिए, एक समझदारी भरा कदम साबित हो सकता है।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.