Franklin Templeton SIP: ₹31,000 करोड़ का दमदार इनफ्लो! निवेशकों ने दिखाया भरोसा

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AuthorMehul Desai|Published at:
Franklin Templeton SIP: ₹31,000 करोड़ का दमदार इनफ्लो! निवेशकों ने दिखाया भरोसा
Overview

Franklin Templeton India के Systematic Investment Plan (SIP) में जनवरी 2026 के दौरान मजबूत रुझान दिखा है। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, SIP बुक ने **₹31,000 करोड़** का स्थिर इनफ्लो आकर्षित किया है। यह लगातार **59 महीनों** से जारी रिटेल निवेशकों की भागीदारी को दर्शाता है, जो अनुशासित निवेश की ताकत को उजागर करता है।

एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) की स्थिरता का राज

Franklin Templeton India ने बताया है कि जनवरी 2026 में उसके Systematic Investment Plan (SIP) बुक में लगातार ग्रोथ जारी रही। लगातार दूसरे महीने ₹31,000 करोड़ का इनफ्लो दर्ज किया गया, जो पिछले साल जनवरी 2025 की तुलना में 17% ज्यादा है। महीने के अंत तक एक्टिव SIP खातों की संख्या भी बढ़कर लगभग 9.92 करोड़ हो गई।

यह लगातार इनफ्लो का सिलसिला तब आया है, जब इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में कुल इनफ्लो पिछले महीने की तुलना में 14% और पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 39% तक कम हो गया था। इससे यह साफ है कि निवेशक मार्केट टाइमिंग के बजाय रुपए कॉस्ट एवरेजिंग (rupee cost averaging) जैसे अनुशासित तरीके को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

लॉन्ग-टर्म फंड परफॉरमेंस ने बढ़ाया भरोसा

SIP की रफ्तार के साथ-साथ, Franklin Templeton के जनवरी 2026 के परफॉरमेंस फैक्टशीट ने इसके मुख्य इक्विटी स्कीम्स की लॉन्ग-टर्म ताकत को भी रेखांकित किया है। 32 साल के इतिहास वाले Franklin India Mid Cap Fund, जो दिसंबर 1993 में लॉन्च हुआ था, ने तब से अब तक लगभग 19.84% का एनुअलाइज्ड रिटर्न दिया है। इस फंड में ₹38.6 लाख का शुरुआती निवेश 30 जनवरी 2026 तक बढ़कर ₹2,252 लाख हो गया था।

इसी तरह, 1993 में शुरू हुए Franklin India Large Cap Fund ने अपने 32 साल के कार्यकाल में करीब 17.42% एनुअलाइज्ड रिटर्न दिया है, जिसने ₹34.9 लाख के निवेश को ₹797.1 लाख में बदल दिया। Templeton India Value Fund ने भी अपनी रणनीति को मजबूत किया, जो लॉन्च होने के बाद से लगभग 17.07% का एनुअलाइज्ड रिटर्न दे रहा है। ये आंकड़े साफ करते हैं कि लंबे समय तक निवेशित रहने वाले निवेशकों के लिए ये स्कीम्स कितनी अच्छी वेल्थ (wealth) बना सकती हैं।

इनफ्लो स्थिर, पर मार्केट में वोलेटिलिटी

जनवरी 2026 का मार्केट कुछ ज्यादा ही वोलेटाइल (volatile) रहा। बेंचमार्क Nifty 50 इंडेक्स ने पिछले एक दशक में अपना सबसे कमजोर जनवरी प्रदर्शन देखा, जो महीने के दौरान 3.10% गिर गया। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) द्वारा लगातार बिकवाली ने इस कमजोरी को और बढ़ाया, जिन्होंने महीने भर में ₹36,000 करोड़ के शेयर बेचे, जिससे करेंसी पर भी दबाव बना। इस अनिश्चितता के माहौल में, निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) जैसे सुरक्षित माने जाने वाले एसेट्स (assets) को तरजीह दी, जिसमें दिसंबर 2025 की तुलना में दोगुना निवेश आया।

इन मुश्किलों के बावजूद, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) महीने के अंत तक बढ़कर ₹81.01 लाख करोड़ हो गई। ICICI Prudential AMC और Nippon India Mutual Fund जैसी बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों ने अच्छा इनफ्लो देखा, हालांकि SBI Mutual Fund और HDFC Mutual Fund जैसी प्रमुख कंपनियों के इक्विटी एयूएम (AUM) में महीने-दर-महीने गिरावट आई।

इक्विटी इनफ्लो की रफ्तार में कमी

जहां SIP में रिटेल निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है, वहीं ओवरऑल इक्विटी म्यूचुअल फंड इनफ्लो में आई नरमी पर ध्यान देने की जरूरत है। जनवरी 2026 में ये इनफ्लो पिछले महीने से 14% और पिछले साल से 39% घटकर ₹24,029 करोड़ रह गया। यह मंदी, लॉन्ग-टर्म फंड परफॉरमेंस के सकारात्मक होने के बावजूद, यह संकेत देती है कि व्यापक बाजार की अस्थिरता और कुछ सेगमेंट्स में वैल्यूएशन (valuations) का बढ़ना निवेशकों को सतर्क कर रहा है। FPIs की लगातार बिकवाली भी घरेलू इक्विटी मार्केट्स के लिए एक जोखिम है, जो निवेशक के सेंटिमेंट (sentiment) को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

आगे का रास्ता: SIP एक स्थिर सहारा

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि जनवरी के आंकड़े भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में एक स्थिर ट्रेंड दिखा रहे हैं, जहां ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच SIP का योगदान एक मजबूत सहारा बना हुआ है। मार्च 2021 से लगातार 59 महीनों तक पॉजिटिव इक्विटी इनफ्लो जारी रहना, म्यूचुअल फंड निवेश, खासकर SIP के माध्यम से, में एक स्ट्रक्चरल शिफ्ट (structural shift) को दर्शाता है। यह लगातार कैपिटल इनफ्यूजन (capital infusion) Franklin Templeton India जैसी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को एक अनुमानित रेवेन्यू स्ट्रीम (revenue stream) देता है और उन्हें अपने लॉन्ग-टर्म फंड परफॉरमेंस का फायदा उठाने का मौका देता है, जिससे वे रिटेल भागीदारी और संभावित मार्केट रिकवरी का लाभ उठा सकते हैं।

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