Franklin Templeton का बड़ा कदम: इन 2 ग्लोबल फंड्स में SIP/STP पर लगी रोक, जानें वजह

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AuthorMehul Desai|Published at:
Franklin Templeton का बड़ा कदम: इन 2 ग्लोबल फंड्स में SIP/STP पर लगी रोक, जानें वजह

Franklin Templeton Mutual Fund ने अपने दो ग्लोबल फंड्स - एशियन इक्विटी फंड (Asian Equity Fund) और यूएस ऑपर्च्युनिटीज इक्विटी एक्टिव फंड (US Opportunities Equity Active Fund) - में नए एसआईपी (SIP) और एसटीपी (STP) रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी है। फंड हाउस पर विदेशी निवेश की रेगुलेटरी लिमिट (Regulatory Limit) पूरी होने के कगार पर है।

क्या है पूरा मामला?

Franklin Templeton Mutual Fund ने फौरन प्रभाव से अपने दो इंटरनेशनल फंड्स, Franklin Asian Equity Fund और Franklin US Opportunities Equity Active Fund, में नए सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) और सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के आवेदन लेना बंद कर दिया है। हालांकि, जो निवेशक पहले से इन फंड्स में SIP या STP कर रहे हैं, उनके मौजूदा निवेश पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

विदेशी निवेश की सीमा का असर

यह रोक इसलिए लगाई गई है क्योंकि भारतीय एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) के लिए विदेशी इक्विटी में निवेश की कुल सीमा लगभग पूरी हो चुकी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और SEBI ने फरवरी 2022 से भारतीय म्यूचुअल फंड्स के विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश की सीमा तय कर रखी है। जब कोई फंड हाउस अपनी विदेशी निवेश कोटे (Quota) के करीब पहुंच जाता है, तो उसे रेगुलेटरी नियमों का पालन करने के लिए नए निवेश स्वीकार करना बंद करना पड़ता है।

यह भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में पहली बार नहीं हो रहा है। पहले भी कई फंड हाउसेज को इसी तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। उदाहरण के लिए, Edelweiss Mutual Fund ने भी इसी वजह से अपने कई इंटरनेशनल फंड्स में नए निवेश पर रोक लगाई थी।

निवेशकों के लिए क्या मतलब?

इसका सीधा मतलब यह है कि जो निवेशक इन खास इंटरनेशनल फंड्स में ऑटोमैटिक निवेश शुरू करना चाहते थे, वे अब ऐसा नहीं कर पाएंगे। हालांकि, मौजूदा निवेशकों के पास जो यूनिट्स हैं, वे सुरक्षित हैं और फंड्स का मैनेजमेंट पहले की तरह चलता रहेगा। फंड हाउस ने यह नहीं बताया है कि यह रोक कब तक जारी रहेगी।

निवेशकों को इन फंड्स में नए रजिस्ट्रेशन फिर से शुरू होने के बारे में जानने के लिए Franklin Templeton की तरफ से आने वाले अपडेट्स पर नजर रखनी होगी। रेगुलेटर्स द्वारा विदेशी निवेश कोटे में ढील दिए जाने या मौजूदा फंड्स में पर्याप्त रिडेम्पशन (Redemption) होने पर ही यह रोक हटाई जा सकती है।

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