क्यों न करें SIP बंद? गिरते बाजार में ही है असली मौका
Franklin Templeton India अपने इक्विटी पोर्टफोलियो को पूरी तरह से निवेशित रख रहा है। कंपनी के प्रेसिडेंट अविनाश सातवलेकर के अनुसार, मौजूदा बाजार की गिरावट को मौजूदा पोजीशन को और मजबूत करने के मौके के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक घटनाओं, जैसे पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, के कारण बाजार में जो मौजूदा अस्थिरता है, वह निवेशकों की भावना और SIP इनफ्लो को प्रभावित कर रही है।
'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' का फायदा उठाएं
सातवलेकर ने निवेशकों को सलाह दी कि नकारात्मक रिटर्न देखने पर वे अपनी SIPs रद्द न करें। उन्होंने समझाया कि SIPs को रोकना निवेशकों को मंदी के दौरान अपने पैसों से ज्यादा यूनिट्स खरीदने से रोकता है – यानी 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' (Rupee Cost Averaging) का लाभ खो देना। उन्होंने चेतावनी दी कि यह आदत बाजार के फिर से वापसी करने पर अंडरपरफॉरमेंस का कारण बन सकती है।
लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन की रणनीति
सातवलेकर ने ऐतिहासिक पैटर्न का हवाला देते हुए कहा कि आमतौर पर बियर मार्केट (Bear Market) कुछ महीनों तक चलते हैं, जबकि बुल मार्केट (Bull Market) सालों तक खिंचते हैं। निवेशकों को छोटी अवधि के नुकसान और अस्थिरता से आगे देखना चाहिए। उन्होंने कहा, "बाजार हर पांच साल में एक ऐसा मौका देता है जब आप सचमुच पैसा लगा सकते हैं"। उन्होंने असली धन-निर्माण को तब निर्णायक रूप से कार्य करना बताया जब दूसरे हिचकिचा रहे हों।
नया फंड लाया गया, जो डाउनसाइड रिस्क को करेगा कम
Franklin Templeton India ने हाल ही में 'Sapphire Equity Long-Short SIF' नाम का एक नया फंड पेश किया है, जिसका मकसद अस्थिर बाजार की स्थितियों से निपटना है। इस फंड की रणनीति नेट एसेट्स के 25% तक शॉर्ट पोजीशन लेने की अनुमति देती है, जिससे बाजार में गिरावट के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलती है। फंड के पोर्टफोलियो मैनेजर अरिहंत जैन ने बताया कि इसका क्वांटिटेटिव मॉडल (Quantitative Model) विभिन्न बाजार वातावरणों के अनुकूल होने के लिए विविध संकेतकों का उपयोग करता है, जिसमें जोखिम प्रबंधन (Risk Management) पर विशेष जोर दिया जाता है।