Franklin India Tech Fund का कमाल! 3 साल में सबसे ज़्यादा रिटर्न, बेंचमार्क को पछाड़ा

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Franklin India Tech Fund का कमाल! 3 साल में सबसे ज़्यादा रिटर्न, बेंचमार्क को पछाड़ा

Franklin India Technology Fund ने पिछले 3 सालों में **10.4%** का शानदार कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया है, जो इसके बेंचमार्क को **6.2%** के बड़े अंतर से पीछे छोड़ता है। हालांकि, यह फंड लंबी अवधि में आगे है, लेकिन छोटी अवधि में Tata Digital India Fund का प्रदर्शन बेहतर रहा है। निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि टेक-फोकस्ड सेक्टर फंड में एक ही इंडस्ट्री में ज़्यादा निवेश के कारण ज़्यादा रिस्क होता है।

3 साल में सबसे आगे Franklin India Technology Fund

टेक्नोलॉजी-केंद्रित म्यूचुअल फंड्स की दुनिया में, Franklin India Technology Fund पिछले तीन सालों में सबसे अव्वल साबित हुआ है। 28 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, इस फंड ने 10.4% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल किया है। यह प्रदर्शन इसके बेंचमार्क, जिसने इसी अवधि में 4.2% का रिटर्न दिया, की तुलना में काफी बेहतर है, जिससे 6.2% का बड़ा अंतर बना है।

अन्य फंड्स का प्रदर्शन

इस कैटेगरी के अन्य प्रमुख फंड्स जैसे SBI Technology Opportunities Fund और ICICI Prudential Technology Fund ने तीन साल में क्रमशः 8.7% और 7.1% का CAGR रिटर्न दिया है। इन फंड्स में, ICICI Prudential Technology Fund सबसे बड़े एसेट्स को मैनेज कर रहा है, जिसका एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹12,547.3 करोड़ तक पहुंच गया है। यह डेटा ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा AUM वाले फंड्स को कवर करता है, जो इस सेक्टर की बड़ी स्कीम्स की एक झलक देता है।

छोटी अवधि में बदला समीकरण

जहां लंबी अवधि में Franklin India Technology Fund का दबदबा है, वहीं हालिया प्रदर्शन के आंकड़े नेतृत्व में बदलाव का संकेत देते हैं। Tata Digital India Fund ने छोटी अवधि में अपने साथियों को पीछे छोड़ दिया, पिछले एक महीने में 8.6% और पिछले तीन महीनों में 7.1% का रिटर्न दर्ज किया। हालांकि, एक साल की अवधि को देखें तो टॉप पांच स्कीम्स में से सभी ने निगेटिव रिटर्न दिखाया, जिसमें Tata Digital India Fund का -9.5% भी शामिल है। यह टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश की भारी वोलैटिलिटी (अस्थिरता) को दर्शाता है।

सेक्टर फंड्स में रिस्क

सेक्टरल फंड्स, डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स से काफी अलग होते हैं क्योंकि वे एक ही इंडस्ट्री में पैसा लगाते हैं। जहां यह रणनीति टेक्नोलॉजी सेक्टर के अच्छा प्रदर्शन करने पर ज़्यादा रिटर्न दे सकती है, वहीं यह निवेशकों को ज़्यादा रिस्क में भी डालती है अगर सेक्टर को किसी तरह की मंदी का सामना करना पड़े। निवेशकों को छोटी अवधि के मुनाफे से आगे बढ़कर फंड की लंबी अवधि की स्थिरता और वोलैटिलिटी को मैनेज करने की क्षमता का मूल्यांकन करना चाहिए। इन फंड्स का भविष्य का प्रदर्शन टेक्नोलॉजी सर्विसेस की व्यापक मांग, ग्लोबल मार्केट ट्रेंड्स और इन पोर्टफोलियो में मौजूद कंपनियों के वैल्यूएशन पर निर्भर करेगा।

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