Franklin India Small Cap Fund ने **20 साल** का सफर पूरा कर एक नया कीर्तिमान रचा है। फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) **₹14,000 करोड़** के आंकड़े को पार कर गया है, हालांकि हालिया प्रदर्शन में अस्थिरता भी देखी गई है।
दो दशकों का सफर और बड़ी उपलब्धि
नवंबर 2005 में अपनी शुरुआत के बाद से, Franklin India Small Cap Fund ने निवेशकों के बीच अपनी एक खास जगह बनाई है। Franklin Templeton द्वारा मैनेज किया जाने वाला यह फंड अब ₹14,000 करोड़ से अधिक का AUM संभाल रहा है। यह फंड स्मॉल-कैप सेगमेंट की उन कंपनियों में निवेश करता है जिनमें लंबी अवधि में तेजी से बढ़ने की क्षमता है, लेकिन साथ ही जोखिम भी काफी ज्यादा है।
लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का जादू
फंड के आंकड़ों के मुताबिक, अनुशासन के साथ निवेश करने वाले निवेशकों को बड़ा फायदा मिला है। अगर किसी ने 15 साल पहले हर महीने ₹10,000 की SIP की होती, तो आज यह फंड करीब ₹81 लाख के बड़े कॉर्पस में बदल गया होता। यह आंकड़े मार्केट साइकिल के दौरान धैर्य रखने की ताकत को दर्शाते हैं।
हालिया प्रदर्शन में क्या बदला?
लंबे समय में शानदार रिटर्न देने के बावजूद, हाल के वर्षों में तस्वीर थोड़ी बदली है। 15 साल का सालाना रिटर्न 19.03% रहा है, जिसने NIFTY Smallcap 250 के 15.75% को पीछे छोड़ा है। हालांकि, पिछले 3 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो फंड ने 12.82% रिटर्न दिया है, जबकि बेंचमार्क इंडेक्स 16.15% पर रहा है। यह अंतर दिखाता है कि स्मॉल-कैप पोर्टफोलियो बाजार की चालों के प्रति कितने संवेदनशील होते हैं।
जोखिम और रणनीति
स्मॉल-कैप फंड्स को 'Very High' रिस्क कैटेगरी में रखा जाता है। इसमें बड़े फंड्स की तुलना में उतार-चढ़ाव ज्यादा होते हैं, क्योंकि छोटी कंपनियां बाजार की गिरावट को जल्दी महसूस करती हैं। फंड के मैनेजर्स R. Janakiraman, Akhil Kalluri और Sandeep Manam लगातार ऐसी कंपनियां तलाश रहे हैं जो टिकाऊ विकास कर सकें।
ध्यान दें: फंड से 1 साल के भीतर पैसा निकालने पर 1% का एग्जिट लोड देना पड़ता है, इसलिए निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों और रिस्क लेने की क्षमता का आकलन जरूर करें।
