Flexi-Cap Funds Split: बड़ी कंपनी या छोटी? फंड मैनेजर्स के बीच बढ़ी दो राय

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Flexi-Cap Funds Split: बड़ी कंपनी या छोटी? फंड मैनेजर्स के बीच बढ़ी दो राय
Overview

Flexi-cap Funds के फंड मैनेजर्स के बीच निवेश को लेकर एक बड़ा विभाजन (split) देखने को मिल रहा है। कुछ मैनेजर स्थिरता (stability) के लिए लार्ज-कैप (large-cap) शेयरों की ओर झुकाव दिखा रहे हैं, जबकि अन्य ग्रोथ और आकर्षक वैल्यूएशन की तलाश में मिड-कैप और स्मॉल-कैप (SMID) शेयरों में निवेश बढ़ा रहे हैं। यह अलग-अलग रणनीति बाजार के अवसरों और जोखिम उठाने की क्षमता पर अलग-अलग दृष्टिकोण को दर्शाती है। मार्च **2026** तक के आंकड़ों के अनुसार, **39** फंडों में से **22** ने लार्ज-कैप होल्डिंग्स बढ़ाईं, जबकि **17** ने SMID शेयरों में निवेश बढ़ाया।

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रणनीति में आया बड़ा फेरबदल

Flexi-cap Funds, जो सभी मार्केट साइज की कंपनियों में निवेश कर सकते हैं, अब बाजार को लेकर अलग-अलग संकेत दे रहे हैं। मार्च 2026 तक, कुल 39 फंडों में से 22 फंडों ने स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए लार्ज-कैप शेयरों में अपना निवेश बढ़ाया। वहीं, बाकी बचे 17 फंडों ने ज्यादा ग्रोथ की उम्मीद में मिड-कैप और स्मॉल-कैप (SMID) शेयरों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। इस विभाजन के कारण इन फंडों के प्रदर्शन में भी अलग-अलग रास्ते दिख सकते हैं, जहां कुछ फंड सुरक्षा पर ध्यान दे रहे हैं, वहीं कुछ छोटी और अधिक वोलेटाइल कंपनियों से ज्यादा रिटर्न कमाने की कोशिश कर रहे हैं। भू-राजनीतिक तनावों के कारण मार्च 2026 में बेंचमार्क Nifty 500 इंडेक्स में लगभग 11% की गिरावट आई थी, जिसने बाजार के झटकों पर फंड मैनेजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं को उजागर किया।

मैनेजरों के दांव: सेक्टर लीडर्स से वैल्यूएशन कॉल्स तक

मैनेजरों का कहना है कि ये अलग-अलग रणनीतियाँ सिर्फ कंपनी के साइज पर आधारित नहीं हैं, बल्कि खास शेयरों और सेक्टर के अवसरों को चुनने का नतीजा हैं। आदित्य बिड़ला सन लाइफ AMC के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर – इक्विटी, हरीश कृष्णन बताते हैं कि IT सर्विसेज, इंश्योरेंस और बैंकिंग जैसे सेक्टरों की लीडिंग कंपनियां अक्सर मिड- और स्मॉल-कैप एरिया में मिलती हैं, जो बाजार का शोर कम होने पर अधिक आकर्षक हो जाती हैं। यह नज़रिया कंपनी के साइज से परे जाकर फंडामेंटल ग्रोथ ड्राइवर्स पर फोकस करने का सुझाव देता है। एक्सिस एमएफ (Axis MF) के सीनियर फंड मैनेजर, सचिन रेलेकर, अपने फंड के आवंटन को स्टॉक के फंडामेंटल्स के आधार पर तय करने की बात कहते हैं, जिसमें हाई-रिस्क वाली कंपनियों को कम किया जाता है और आकर्षक वैल्यूएशन वाली कंपनियों में निवेश बढ़ाया जाता है। सैमको एमएफ (Samco MF) ने पिछले साल में लार्ज-कैप एक्सपोजर को लगभग 25% बढ़ाया क्योंकि उनकी मोमेंटम रणनीति तब लार्ज कैप के मजबूत प्रदर्शन के पक्ष में थी। वैल्यूएशन भी मायने रखता है: मार्च 2026 में Nifty 50 का फॉरवर्ड P/E लगभग 20.14 था, जो एक उचित वैल्यूएशन माना जा रहा है। लार्ज कैप अपने 3-साल के औसत P/E से नीचे ट्रेड कर रहे थे, और मिड/स्मॉल कैप भी ऐतिहासिक औसत से नीचे थे, जो विभिन्न सेगमेंट्स में अवसरों की ओर इशारा करते हैं।

फंडों की तुलना: आवंटन और पिछला प्रदर्शन

सैमको (Samco), 360 वन, और मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) के फंडों ने लार्ज-कैप होल्डिंग्स को बढ़ाने में अगुवाई की। हालांकि, इस बढ़ोतरी के बाद भी, मार्च 2026 तक उनकी लार्ज-कैप हिस्सेदारी 60% या उससे कम बनी रही। यह HDFC Flexicap Fund जैसे बड़े फंडों के विपरीत है, जिसने 78% हिस्सेदारी लार्ज कैप में रखी, और Nifty 500 बेंचमार्क, जिसके पास 60% से ज्यादा हिस्सेदारी लार्ज कैप में है। ऐतिहासिक रूप से, फ्लेक्सीकैप फंडों ने अनुकूलन क्षमता दिखाई है। अक्टूबर 2025 को समाप्त हुए साल में, कई बड़े फ्लेक्सी-कैप फंडों ने Nifty 500 TRI से बेहतर प्रदर्शन किया, जैसे अनिश्चित समय में लार्ज कैप जोड़ना या बाजार में गिरावट के बाद मिड-कैप बढ़ाना। मौजूदा विभाजन भी इसी तरह की प्रतिक्रिया हो सकती है, जिसमें कुछ मैनेजर भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच डिफेंसिव लार्ज कैप चुन रहे हैं, जबकि अन्य SMID अवसरों का फायदा उठा रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 26 में मिड-कैप ने सकारात्मक रिटर्न दिया, जबकि लार्ज और स्मॉल कैप में गिरावट देखी गई।

दोनों रणनीतियों के लिए जोखिम

अपनी फ्लेक्सिबिलिटी के बावजूद, फ्लेक्सीकैप फंडों को इन अलग-अलग रणनीतियों से जुड़े जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। जो फंड लार्ज-कैप होल्डिंग्स बढ़ा रहे हैं, उन्हें अर्थव्यवस्था के तेज होने पर SMID सेगमेंट्स से मिलने वाले उच्च विकास को खोने का जोखिम है। इसके विपरीत, मिड-कैप और स्मॉल-कैप में भारी निवेश वाले फंडों को ज्यादा वोलेटिलिटी का सामना करना पड़ता है। मार्च 2026 में, Nifty Smallcap 100 इंडेक्स अपने पीक से लगभग 22% गिर गया, जो छोटे, कम लिक्विड शेयरों में जोखिम को दर्शाता है। भू-राजनीतिक तनाव, खासकर मध्य पूर्व और तेल आपूर्ति को लेकर, महंगाई बढ़ा सकते हैं, भारत के चालू खाते के घाटे (current account deficit) को चौड़ा कर सकते हैं और सरकारी वित्त पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे ग्रोथ-केंद्रित पोर्टफोलियो को अधिक नुकसान हो सकता है। साथ ही, फ्लेक्सीकैप विविधीकरण (diversification) प्रदान करते हैं, लेकिन उनकी सफलता काफी हद तक फंड मैनेजर के कौशल पर निर्भर करती है। एक कमजोर प्रक्रिया अप्रत्याशित परिणाम दे सकती है, खासकर अनिश्चित बाजारों में। 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले नए SEBI नियमों से एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) के लिए एक अधिक विनियमित माहौल बनेगा, जो संभवतः फीस और अनुपालन को प्रभावित कर सकता है।

आउटलुक: निवेशकों की रुचि और आर्थिक सपोर्ट

अनिश्चित बाजारों में अपनी अनुकूलन क्षमता के कारण फ्लेक्सीकैप कैटेगरी निवेशकों के बीच लोकप्रिय बने रहने की उम्मीद है। इक्विटी म्यूचुअल फंड, जिसमें फ्लेक्सीकैप भी शामिल हैं, ने मार्च 2026 में मजबूत इनफ्लो देखा, जिसमें फ्लेक्सी-कैप फंडों ने खुदरा निवेशकों की काफी दिलचस्पी आकर्षित की। विश्लेषकों को उम्मीद है कि भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, स्थिर जीडीपी ग्रोथ और विश्वसनीय कॉरपोरेट कमाई, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, इस इनफ्लो को जारी रखेगी। फ्लेक्सिबिलिटी की मौजूदा मांग का मतलब है कि वे फंड जो लार्ज-कैप बनाम SMID आवंटन की बहस को प्रभावी ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं और भू-राजनीति व वैल्यूएशन के जोखिमों को नेविगेट कर सकते हैं, वे निवेशक का ध्यान आकर्षित करने की संभावना रखते हैं। भारत के समग्र आर्थिक विकास का दृष्टिकोण सकारात्मक है, जो इक्विटी बाजारों और लचीली फंड रणनीतियों के लिए एक अच्छा माहौल प्रदान करता है।

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