सावधानी की ओर बढ़ता कदम
जनवरी 2026 तक, भारतीय इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लगातार 59 महीनों से निवेश आ रहा है, जो देश की लंबी अवधि की आर्थिक संभावनाओं में निवेशकों के भरोसे को दिखाता है। इस बीच, फ्लेक्सी-कैप फंड्स ने लगातार बड़ा निवेश आकर्षित किया है, जिसमें अकेले जनवरी में ₹7,672 करोड़ आए। हालांकि, इस लगातार इनफ्लो के पीछे फंड मैनेजर्स की रणनीति में एक बड़ा बदलाव आया है। 2024 के अंत से मिड और स्मॉल-कैप एलोकेशन से हटकर, अब 70% से ज्यादा फ्लेक्सी-कैप पोर्टफोलियो लार्ज-कैप स्टॉक्स को सपोर्ट कर रहे हैं। यह कदम ग्लोबल अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों से बचाव के लिए उठाया गया है, जो दो साल पहले की आक्रामक ग्रोथ वाली रणनीतियों से बिलकुल अलग है।
क्यों हो रहा है ये बदलाव?
मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंट में 2024 के अंत में दिखी तेजी के जवाब में, लार्ज-कैप स्टॉक्स में एलोकेशन बढ़ाया गया है, जो अभी कई फ्लेक्सी-कैप फंड्स के लिए 70% से अधिक पोर्टफोलियो पर हावी हैं। इस रक्षात्मक रुख के साथ-साथ कैश या लिक्विड एसेट्स (liquid assets) में भी बड़ा निवेश किया गया है। उदाहरण के लिए, HDFC Flexi Cap Fund के पास लगभग 15% कैश और कैश इक्विवेलेंट्स हैं, वहीं Parag Parikh Flexi Cap Fund के पास लिक्विड एसेट्स और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में करीब 20.9% का निवेश है। जहां ऐसे एलोकेशन डाउनसाइड रिस्क को कम करने और अच्छी वैल्यूएशन का इंतजार करने के लिए हैं, वहीं ये बड़ा अवसर खोने का भी संकेत देते हैं। यदि मार्केट में तेजी आती है, तो ये हाई कैश रिजर्व्स फुल इक्विटी एक्सपोजर वाले फंड्स की तुलना में प्रदर्शन को पीछे छोड़ सकते हैं।
फंड्स का परफॉरमेंस और मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर
जनवरी 2026 तक, फ्लेक्सी-कैप कैटेगरी ने कुल ₹1.33 लाख करोड़ से ज्यादा एसेट्स मैनेज किए, जिसमें Parag Parikh Flexi Cap Fund सबसे आगे रहा। इसके बाद HDFC Flexi Cap Fund का नंबर आया, जिसके पास ₹97,452 करोड़ थे, और Franklin India Flexi Cap Fund के पास ₹19,528 करोड़ रहे। इन प्रमुख फंड्स की बात करें तो Parag Parikh Flexi Cap Fund की रणनीति में लगभग 12% ओवरसीज इक्विटी शामिल है, जो भौगोलिक विविधीकरण (diversification) प्रदान करता है। वहीं, HDFC Flexi Cap Fund और Franklin India Flexi Cap Fund घरेलू बाजार पर अधिक केंद्रित हैं। Nifty Financial Services Index, जो इन फंड्स के लिए एक अहम सेक्टर है, ने फरवरी 2026 तक लगभग 22.83% का रिटर्न दिया। हालांकि, 2026 की शुरुआत में अमेरिकी टैरिफ की धमकियों और ईरान में अस्थिरता जैसे लगातार भू-राजनीतिक तनावों के कारण विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) 2025 और 2026 की शुरुआत में बिकवाली करते रहे। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि FIIs 2026 के दूसरे हाफ में ही नेट बाइंग फिर से शुरू कर सकते हैं। इसके बावजूद, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल बायर्स (DIIs) सपोर्ट दे रहे हैं और जनवरी 2026 में SIP इनफ्लो ₹31,002 करोड़ पर स्थिर रहा।
⚠️ बड़े जोखिमों पर एक नजर
लार्ज-कैप और बढ़ी हुई कैश होल्डिंग्स की ओर रणनीतिक बदलाव, हालांकि अस्थिर समय में समझदारी भरा है, पर इसमें अपने जोखिम हैं। HDFC Flexi Cap ( 15%) और Parag Parikh Flexi Cap ( ~21%) जैसे फंड्स में बड़ा कैश रिजर्व, मार्केट की तेजी के दौरान प्रदर्शन में बाधा बन सकता है। इसके अलावा, HDFC Flexi Cap Fund में फंड मैनेजर का बदलाव भी देखा गया है, जहां फरवरी 2026 में अमित गणत्रा ने रोशी जैन के इस्तीफे के बाद पदभार संभाला। ऐसे बदलावों से रणनीति में थोड़ा बदलाव आ सकता है। Franklin India Flexi Cap Fund का 1.7% का एक्सपेंस रेश्यो (expense ratio) भी जांच का विषय है। ग्लोबल भू-राजनीतिक अनिश्चितता एक बड़ा जोखिम बनी हुई है, जो एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स और निवेशक भावना को प्रभावित कर सकती है।