सितंबर के दौरान भारतीय शेयर बाजार में सुस्ती थी, लेकिन Flexi-cap म्यूचुअल फंड्स में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया। कुल **₹6,701.8 करोड़** का निवेश आने के बाद यह साफ है कि निवेशक इस कैटेगरी की लचीली रणनीति पर भरोसा कर रहे हैं।
सितंबर का महीना इक्विटी मार्केट के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन निवेशकों ने Flexi-cap फंड्स पर अपना दांव जारी रखा। इस कैटेगरी में कुल ₹6,701.8 करोड़ का नेट इन्फ्लो (Net Inflow) दर्ज किया गया। हालांकि, टॉप तीन फंड्स—HDFC Flexi Cap Fund, Parag Parikh Flexi Cap Fund, और ICICI Prudential Flexi Cap Fund—ने बाजार की इस अस्थिरता को संभालने के लिए बिल्कुल अलग तरीके अपनाए।
फंड्स की अलग-अलग रणनीति
Flexi-cap का मतलब है कि फंड मैनेजर लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप में अपनी मर्जी से पैसा लगा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, HDFC Flexi Cap Fund में सबसे ज्यादा ₹1,634 करोड़ का निवेश आया। इसका फोकस लार्ज-कैप स्टॉक्स पर रहा (करीब 70% एसेट्स), जिसकी वजह से सितंबर में फंड में 5.89% की गिरावट दिखी। हालांकि, इसका 5 साल का ट्रैक रिकॉर्ड 14.92% का रहा है।
दूसरी तरफ, Parag Parikh Flexi Cap Fund ने 56 स्टॉक्स के पोर्टफोलियो के साथ रिस्क कंट्रोल पर जोर दिया। इसका डिफेंसिव रुख काम आया और इसमें गिरावट केवल 2.19% रही। वहीं, ICICI Prudential Flexi Cap Fund ने आक्रामक रुख अपनाते हुए स्मॉल-कैप में 23% से ज्यादा पैसा लगाया। इसका असर यह हुआ कि सितंबर में इसमें 6.24% की गिरावट आई, लेकिन बीते 6 महीनों में यह 16.43% के रिटर्न के साथ सबसे आगे रहा।
निवेशकों के लिए सबक
यह साफ है कि सभी Flexi-cap फंड एक जैसे नहीं हैं। कोई फंड लार्ज-कैप की स्थिरता चाहता है, तो कोई स्मॉल-कैप के जरिए मुनाफा बनाना चाहता है। इसलिए, केवल नाम देखकर निवेश करने के बजाय, यह देखें कि फंड मैनेजर की वर्तमान रणनीति आपके रिस्क लेने की क्षमता से मेल खाती है या नहीं।
