अगस्त 2026 में HDFC, ICICI Prudential और Parag Parikh जैसे बड़े फ्लेक्सी-कैप फंड्स में निवेशकों ने **₹1,100 करोड़** का निवेश किया है। हालांकि इनफ्लो एक जैसा है, लेकिन इन फंड्स की निवेश स्ट्रैटेजी (Strategy) में जमीन-आसमान का अंतर है।
अगस्त 2026 में फ्लेक्सी-कैप म्यूचुअल फंड कैटेगरी में निवेशकों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। HDFC Flexi Cap, ICICI Prudential Flexi Cap और Parag Parikh Flexi Cap, इन तीनों ही बड़े फंड्स में लगभग ₹1,100 करोड़ का निवेश आया है। फ्लेक्सी-कैप फंड्स की सबसे बड़ी खूबी यह है कि फंड मैनेजर अपनी मर्जी से लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में पैसा लगा सकते हैं, लेकिन इस बार इन फंड्स का 'पोर्टफोलियो मिक्स' पूरी तरह अलग रहा है।
HDFC Flexi Cap का डिफेंसिव रुख
आसेट बेस के मामले में सबसे बड़े फंड्स में से एक HDFC Flexi Cap ने अगस्त में काफी सतर्कता बरती है। फंड ने अपनी 70% पूंजी लार्ज-कैप कंपनियों में सुरक्षित रखी है। UltraTech Cement जैसे स्टॉक्स में निवेश बढ़ाने और कुछ पुराने स्टॉक्स से निकलने के फैसले से साफ है कि वे कम रिस्क वाली ग्रोथ पर दांव लगा रहे हैं।
ICICI Prudential की स्मॉल-कैप पर नजर
दूसरी तरफ, ICICI Prudential Flexi Cap Fund ने आक्रामक रुख अपनाते हुए अपनी स्मॉल-कैप हिस्सेदारी को बढ़ाकर लगभग 24.6% कर दिया है। ऑटोमोबाइल और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे सेक्टर्स में स्मॉल-कैप्स का तड़का लगाने के कारण, यह फंड तेजी के बाजार में तो दमदार प्रदर्शन कर सकता है, लेकिन मार्केट की गिरावट के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव (Volatility) भी ज्यादा रह सकता है।
Parag Parikh की कंसंट्रेटेड रणनीति
Parag Parikh Flexi Cap Fund हमेशा से अपनी 'बाय एंड होल्ड' फिलॉसफी के लिए मशहूर रहा है। यह फंड कई स्टॉक्स में पैसा फैलाने के बजाय अपने चुनिंदा पसंदीदा स्टॉक्स पर बड़ा दांव लगाता है। हाल ही में DLF और Knowledge Realty Trust जैसे नए स्टॉक्स को शामिल करने के साथ-साथ, इनका पोर्टफोलियो अब भी इंटरनेशनल इक्विटीज के प्रति एक्सपोजर रखता है।
निवेशकों के लिए सबक
भले ही इन तीनों फंड्स में पैसा बराबर आ रहा हो, लेकिन इनका रिस्क प्रोफाइल पूरी तरह अलग है। HDFC जहां बड़े निवेश के साथ स्टेबिलिटी ढूंढ रहा है, वहीं ICICI स्मॉल-कैप्स के जरिए अधिक रिस्क ले रहा है और Parag Parikh का ध्यान चुनिंदा कंपनियों पर है। निवेशकों को सलाह है कि केवल इनफ्लो देखकर नहीं, बल्कि फंड मैनेजर की स्ट्रैटेजी और बदलते मार्केट कंडिशन्स के आधार पर अपने फैसले लें।
