म्यूचुअल फंड में बहार! फ्लेक्सी-कैप फंडों में **24%** की रेकॉर्ड वृद्धि, कुल फोलियो हुए **27.86 करोड़**

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
म्यूचुअल फंड में बहार! फ्लेक्सी-कैप फंडों में **24%** की रेकॉर्ड वृद्धि, कुल फोलियो हुए **27.86 करोड़**

भारतीय म्यूचुअल फंड (MF) इंडस्ट्री में निवेशकों की संख्या में ज़बरदस्त उछाल आया है। जून महीने के अंत तक कुल निवेशक खातों (फोलियो) की संख्या **27.86 करोड़** के पार पहुंच गई, जिसमें फ्लेक्सी-कैप फंडों ने **24.3%** की सबसे तेज़ ग्रोथ दर्ज की है।

Detailed Coverage

फ्लेक्सी-कैप फंडों में तेज़ रफ़्तार

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में रिटेल निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। जून 2026 के अंत तक, कुल फोलियो की संख्या 27.86 करोड़ तक पहुंच गई। इस दौरान, फ्लेक्सी-कैप फंडों में 24.3% की जबरदस्त वृद्धि देखी गई, जो उन्हें सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली कैटेगरी बनाता है। ये फंड्स लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप कंपनियों में निवेश की फ्लेक्सिबिलिटी देते हैं, और निवेशकों के बीच इनकी लोकप्रियता बढ़ रही है। जून के अंत तक फ्लेक्सी-कैप फंडों के कुल फोलियो 2.42 करोड़ थे।

सेक्टरल और थीमैटिक फंड का दबदबा

फ्लेक्सी-कैप फंडों की तेज़ ग्रोथ के बावजूद, सेक्टरल और थीमैटिक फंड अभी भी फोलियो संख्या के हिसाब से सबसे बड़े इक्विटी कैटेगरी बने हुए हैं, जिनके 3.25 करोड़ फोलियो हैं। यह सेगमेंट, जो खास इंडस्ट्रीज़ या इन्वेस्टमेंट थीम पर फोकस करता है, कुल रिटेल इक्विटी फोलियो का 15.3% है।

इनफ्लो ट्रेंड्स और रिटेल की पसंद

जून में इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीम्स में रिटेल इनफ्लो ₹28,973 करोड़ रहा। इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा मिड-कैप, स्मॉल-कैप और फ्लेक्सी-कैप स्ट्रैटेजीज़ की ओर गया। मिड-कैप फंडों में ₹6,090 करोड़, स्मॉल-कैप फंडों में ₹5,602 करोड़, और फ्लेक्सी-कैप फंडों में ₹5,231 करोड़ का नेट इनफ्लो हुआ। इससे पता चलता है कि जहां नए खाते खोलने में फ्लेक्सी-कैप फंड आगे हैं, वहीं मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड भी निवेशकों का ध्यान खींच रहे हैं।

टैक्स-सेविंग स्कीम्स में गिरावट

इंडस्ट्री में एक और अहम बदलाव इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम्स (ELSS) में आई गिरावट है। इन टैक्स-सेविंग फंडों के फोलियो में पिछले साल की तुलना में 3.5% की कमी आई है। इसका मुख्य कारण भारत में नए टैक्स रिजीम को अपनाना है, जो पुराने रिजीम की तरह इन निवेशों पर समान टैक्स लाभ नहीं देता है। यह बदलाव निवेशकों के लिए टैक्स प्लानिंग के बजाय लंबी अवधि के धन सृजन लक्ष्यों के आधार पर फंड चुनने के महत्व को दर्शाता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.