जून महीने में भारतीय इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश **26%** बढ़कर **₹28,961 करोड़** पर पहुंच गया। इसी के साथ इंडस्ट्री के कुल असेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ने **₹82.22 लाख करोड़** का रिकॉर्ड स्तर छुआ। हालांकि, मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी, लेकिन डेट फंड से पैसा निकलता रहा।
निवेशकों ने इक्विटी में लगाया दांव
भारतीय निवेशकों ने जून महीने में इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स में जमकर पैसा लगाया। जून में ₹28,961 करोड़ का नेट इनफ्लो आया, जो मई के ₹22,897 करोड़ के मुकाबले 26.5% ज्यादा है। घरेलू रिटेल निवेशकों की इस ताबड़तोड़ भागीदारी की वजह से म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल असेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) जून के अंत तक ₹82.22 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले महीने ₹81.58 लाख करोड़ था।
मिड-कैप और स्मॉल-कैप की धूम
आंकड़े बताते हैं कि निवेशकों का रुझान मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स की ओर ज्यादा रहा। जून में मिड-कैप फंड्स में ₹6,090.2 करोड़ आए, जो मई के ₹4,385 करोड़ से काफी ज्यादा है। वहीं, स्मॉल-कैप फंड्स में भी ₹5,602 करोड़ का इनफ्लो दर्ज किया गया, जबकि मई में यह ₹4,946 करोड़ था। लार्ज-कैप फंड्स में थोड़ी रिकवरी दिखी और इनमें ₹2,067.5 करोड़ का इनफ्लो आया, जो मई के ₹1,592 करोड़ से ज्यादा है।
सेक्टरल फंड्स और गोल्ड ईटीएफ में तेजी
खास प्रोडक्ट्स में भी निवेशकों की रुचि बढ़ी। सेक्टरल और थीमैटिक फंड्स में जून में ₹1,469.3 करोड़ का इनफ्लो आया, जो मई के ₹648 करोड़ से दोगुना से भी ज्यादा है। इससे यह पता चलता है कि निवेशक अब खास सेक्टर्स में निवेश करने से कतरा नहीं रहे। वहीं, गोल्ड एक्सचेंज-Traded फंड्स (ETFs) ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और ₹3,443 करोड़ का इनफ्लो आकर्षित किया, जबकि मई में इनमें ₹725 करोड़ का आउटफ्लो (पैसा निकलना) देखा गया था। हाइब्रिड फंड्स, जो अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश करते हैं, उनमें भी ₹12,892.8 करोड़ का अच्छा इनफ्लो दर्ज हुआ।
डेट फंड्स से पैसा निकलता रहा
जहां इक्विटी और गोल्ड सेगमेंट में अच्छी कमाई हुई, वहीं डेट फंड्स से बड़ी मात्रा में पैसा निकाला गया। लिक्विड फंड्स से ₹42,293.3 करोड़ निकाले गए, जो मई के ₹29,681 करोड़ से ज्यादा है। इसी तरह, कॉर्पोरेट बॉन्ड फंड्स से भी ₹7,557.3 करोड़ का आउटफ्लो देखा गया। इक्विटी में इनफ्लो और डेट में आउटफ्लो का यह अंतर दिखाता है कि निवेशक, आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद, जोखिम वाले एसेट्स में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं।
आगे क्या देखें?
डेट फंड्स से लगातार पैसा निकलना और इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम्स (ELSS) से ₹633.9 करोड़ का आउटफ्लो चिंता का विषय है। निवेशकों को आगे के मंथली डेटा पर नजर रखनी होगी कि क्या सेक्टरल और थीमैटिक फंड्स में इनफ्लो का यह उछाल एक स्थायी ट्रेंड है या सिर्फ बाजार के प्रदर्शन पर आधारित एक अस्थायी रुझान। इसके अलावा, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि लिक्विड फंड्स से होने वाला आउटफ्लो आने वाले महीनों में इंडस्ट्री की लिक्विडिटी और ब्याज दरों को कैसे प्रभावित करता है।
