Equity Mutual Funds में बंपर निवेश! जुलाई में ₹28,973 करोड़ आए, SIP ने बनाया रिकॉर्ड

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Equity Mutual Funds में बंपर निवेश! जुलाई में ₹28,973 करोड़ आए, SIP ने बनाया रिकॉर्ड

July के महीने में निवेशकों ने Equity Mutual Funds में जमकर पैसा लगाया है। इस दौरान कुल **₹28,973 करोड़** का निवेश आया, जो पिछले साल के मुकाबले **26%** ज्यादा है। हालांकि, डेट फंड से पैसा निकाला गया, लेकिन सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के ज़रिए **₹31,781 करोड़** का रिकॉर्ड निवेश आया, जो लॉन्ग-टर्म पर भरोसे को दिखाता है।

इक्विटी फंड्स में दिखी मजबूत डिमांड

July में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेशकों का भरोसा कायम रहा। कुल ₹28,973 करोड़ का निवेश आया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा ₹22,908 करोड़ था। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद रिटेल निवेशकों की रुचि बनी हुई है।

मिड-कैप और स्मॉल-कैप की धूम, SIP में नया कीर्तिमान

इक्विटी फंड्स में भी मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्कीम्स सबसे ज्यादा पसंद की गईं। मिड-कैप फंड्स में ₹6,090 करोड़ का इनफ्लो आया, वहीं स्मॉल-कैप फंड्स ने ₹5,602 करोड़ आकर्षित किए। यह दिखाता है कि निवेशक बड़े रिटर्न की उम्मीद में ज्यादा रिस्क लेने को तैयार हैं। सबसे खास बात यह रही कि SIP के ज़रिए निवेश ₹31,781 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। एक्टिव SIP अकाउंट्स की संख्या भी बढ़कर 9.78 करोड़ हो गई, जो अनुशासित तरीके से धन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

सोने-चांदी में भी निवेश बढ़ा

सिर्फ शेयरों में ही नहीं, बल्कि कीमती धातुओं में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। गोल्ड ईटीएफ (ETF) में पिछले महीने के आउटफ्लो के मुकाबले इस बार ₹3,443 करोड़ का इनफ्लो देखा गया। वहीं, सिल्वर इन्वेस्टमेंट में तो और भी बड़ी तेजी आई और ₹4,286 करोड़ का निवेश आया, जबकि पिछली तिमाही में इसमें से पैसा निकाला जा रहा था। कीमती धातुओं में यह बढ़ती रुचि निवेशकों के पोर्टफोलियो को इक्विटी मार्केट की अस्थिरता से बचाने की कोशिश को दर्शाती है।

डेट फंड से क्यों निकला पैसा?

कुल मिलाकर म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में ₹52,949 करोड़ का नेट आउटफ्लो देखा गया, जिसका मुख्य कारण डेट फंड्स से ₹1.09 लाख करोड़ का बाहर जाना रहा। इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि यह एक मौसमी पैटर्न है, क्योंकि संस्थागत (institutional) और रिटेल निवेशक तिमाही के अंत में टैक्स देनदारियों को पूरा करने के लिए पैसा निकाल रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि फंड अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं। इन आउटफ्लो के बावजूद, इक्विटी पोर्टफोलियो में लगातार बढ़त के चलते इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर ₹82.22 लाख करोड़ हो गया।

आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बाजार की मौजूदा अस्थिरता के बीच इक्विटी और SIP में निवेश इसी रफ्तार से जारी रहता है या नहीं। साथ ही, हाइब्रिड, मल्टी-एसेट और आर्बिट्राज जैसी स्ट्रेटेजीज़ में निवेशकों का रुझान भी एक अहम पहलू रहेगा, जो कम जोखिम वाले विकल्प तलाश रहे हैं।

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