Equity Mutual Fund: निवेशकों ने लगाया दांव, H1 2026 में ₹4.07 ट्रिलियन का इनफ्लो, NFO कलेक्शन में भारी गिरावट

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AuthorNeha Patil|Published at:
Equity Mutual Fund: निवेशकों ने लगाया दांव, H1 2026 में ₹4.07 ट्रिलियन का इनफ्लो, NFO कलेक्शन में भारी गिरावट

साल 2026 के पहले छह महीनों में इक्विटी म्यूचुअल फंड में **₹4.07 ट्रिलियन** का भारी इनफ्लो आया है। लगातार SIP निवेश और स्थापित फंडों में लम्प-सम फ्लो इसके मुख्य कारण रहे। वहीं, न्यू फंड ऑफर (NFO) से कलेक्शन छह साल के निचले स्तर पर आ गया है, जो दिखाता है कि निवेशक अब थीमैटिक (Thematic) लॉन्च की जगह आजमाए हुए और डायवर्सिफाइड (Diversified) स्कीम्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेशकों का भरोसा

साल 2026 के पहले छमाही में भारतीय निवेशकों ने इक्विटी म्यूचुअल फंड में अपना मजबूत भरोसा दिखाया है। एक्टिव इक्विटी स्कीम्स में कुल इनफ्लो ₹4.07 ट्रिलियन रहा। यह प्रदर्शन काफी मजबूत है और यह 2024 की दूसरी छमाही में दर्ज किए गए रिकॉर्ड ₹4.34 ट्रिलियन से थोड़ा ही कम है। लगातार आने वाला यह पैसा रिटेल निवेशकों की तरफ से सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए और लम्प-सम निवेश के रूप में आ रहा है।

नए फंडों से दूर भाग रहे निवेशक

बाजार में पैसा तो खूब आ रहा है, लेकिन न्यू फंड ऑफर्स (NFOs) का ट्रेंड बिलकुल अलग कहानी बयां कर रहा है। NFOs से कलेक्शन घटकर ₹7,092 करोड़ रह गया है। यह पिछले छमाही में देखे गए ₹22,026 करोड़ की तुलना में एक बड़ी गिरावट है। असल में, NFOs का कुल इक्विटी इनफ्लो में योगदान सिर्फ 1.7% रहा, जो पिछले छह सालों में सबसे कम है।

क्यों चुने जा रहे हैं पुराने फंड?

NFOs की घटती लोकप्रियता बताती है कि भारतीय निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो को मैनेज करने का तरीका बदल रहे हैं। हाल के सालों में, थीमैटिक और सेक्टरल फंड, जो किसी खास इंडस्ट्री पर फोकस करते हैं, बहुत पॉपुलर थे और उन्होंने भारी मात्रा में पैसा आकर्षित किया था। हालांकि, 2023 और 2024 में लॉन्च हुए इन स्पेशलाइज्ड फंडों का प्रदर्शन कई निवेशकों के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। नतीजतन, निवेशक अब अपना पैसा स्थापित, डायवर्सिफाइड फंडों जैसे फ्लेक्सीकैप (Flexicap), मल्टीकैप (Multicap), और मिडकैप (Midcap) स्कीम्स की ओर ले जा रहे हैं। ये फंड आमतौर पर कंपनियों में ज्यादा एक्सपोजर देते हैं, जिससे बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान थीमैटिक बेट्स की तुलना में ज्यादा स्थिरता मिलती है।

मार्केट की स्थिरता के लिए इसका क्या मतलब है?

ब्रॉडर स्टॉक मार्केट के लिए, यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताता है कि पैसा नए, सट्टा वाले लॉन्च की बजाय, आजमाए हुए ट्रैक रिकॉर्ड वाले फंडों में केंद्रित हो रहा है। बाजार में आने वाले पैसे की मात्रा भले ही ऊंची बनी हुई है, लेकिन नए थीमैटिक प्रोडक्ट्स के लिए घटती रुचि एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को अपनी लॉन्च स्ट्रैटेजी पर फिर से विचार करने पर मजबूर कर सकती है। निवेशक साफ तौर पर नए फंड लॉन्च के रोमांच से ज्यादा लंबी अवधि के पोर्टफोलियो संतुलन को प्राथमिकता दे रहे हैं।

आने वाले महीनों के लिए मुख्य बात यह देखना होगी कि क्या मौजूदा, डायवर्सिफाइड स्कीम्स को प्राथमिकता देने का यह ट्रेंड जारी रहता है। निवेशक यह देख सकते हैं कि ये स्थापित फंड कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़ने के साथ अपने पोर्टफोलियो वेटेज को कैसे मैनेज करते हैं। इसके अलावा, बाजार की अस्थिरता में कोई भी बड़ा बदलाव यह प्रभावित कर सकता है कि निवेशक स्थिर, डायवर्सिफाइड विकल्पों पर केंद्रित रहते हैं या भविष्य के फंड ऑफर्स में फिर से उच्च-विकास, स्पेशलाइज्ड अवसरों की तलाश करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.