Edelweiss Asset Management ने 10 जुलाई 2026 से अपने सात विदेशी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में नई SIP और STP (सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान) को बंद कर दिया है। यह फैसला फॉरेन एसेट्स में रेगुलेटरी लिमिट के करीब पहुंचने के कारण लिया गया है, हालांकि मौजूदा SIP जारी रहेंगी।
Edelweiss MF का बड़ा फैसला: सात विदेशी स्कीम्स में नई SIP पर रोक
Edelweiss Asset Management Company ने अपने निवेशकों को एक बड़ा झटका देते हुए, सात विदेशी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में नए Systematic Investment Plans (SIPs) और Systematic Transfer Plans (STPs) के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी है। यह नियम 10 जुलाई 2026 से लागू हो गया है। इस फैसले के बाद, जो निवेशक इन खास इंटरनेशनल फंड्स में एकमुश्त या नियमित निवेश शुरू करना चाहते थे, वे अब ऐसा नहीं कर पाएंगे।
किन स्कीम्स पर पड़ा असर?
जिन सात स्कीम्स में यह रोक लगाई गई है, उनके नाम हैं: Edelweiss ASEAN Equity Off-shore Fund, Greater China Equity Off-shore Fund, US Technology Equity Fund of Funds, Emerging Markets Opportunities Equity Offshore Fund, Europe Dynamic Equity Offshore Fund, Edelweiss US Value Equity Off-shore Fund, और MSCI India Domestic & World Healthcare 45 Index Fund। कंपनी ने साफ किया है कि जो निवेशक पहले से इन स्कीम्स में SIP या STP कर रहे हैं, उनका पैसा पहले की तरह निवेश होता रहेगा।
विदेशी निवेश की सीमाएं: RBI और SEBI का नियम
यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) द्वारा विदेशी निवेश पर लगाई गई उद्योग-व्यापी सीमा के कारण उठाया गया है। रेगुलेटर ने म्यूचुअल फंड्स के लिए विदेशी सिक्योरिटीज में कुल $7 बिलियन का निवेश सीमा तय की है, और इसके अलावा $1 बिलियन केवल विदेशी Exchange Traded Funds के लिए हैं। यह सीमा 2008 से जस की तस बनी हुई है।
इंडस्ट्री पहले ही $7 बिलियन की लिमिट पार कर चुकी
साल 2022 की शुरुआत में ही म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने $7 बिलियन की कुल सीमा को पार कर लिया था, जिसके बाद रेगुलेटर्स ने नए निवेश पर रोक लगा दी थी। इस पॉलिसी के तहत, हर एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) केवल उतनी ही राशि विदेश में निवेश कर सकती है, जितनी की headroom उनके पास 1 फरवरी 2022 को थी। Edelweiss Asset Management अपनी तय विदेशी निवेश सीमा तक पहुंच गया है, इसलिए उन्हें नए सब्सक्रिप्शन रोकने पड़े हैं ताकि वे रेगुलेटरी दिशानिर्देशों का उल्लंघन न करें।
निवेशकों की रणनीति पर असर
जो निवेशक अपने पोर्टफोलियो को इंटरनेशनल मार्केट्स में डाइवर्सिफाई करने के लिए इन फंड्स का इस्तेमाल करते थे, उन्हें यह जानना चाहिए कि यह Edelweiss के साथ अकेला मामला नहीं है। फंड हाउस ने पहले ही अक्टूबर 2025 में लम्प-सम (एकमुश्त) निवेश पर रोक लगा दी थी और बाद में बाकी बची क्षमता को मैनेज करने के लिए प्रति PAN ₹5,000 प्रति माह की व्यक्तिगत कैप भी लगा दी थी।
पिछले कुछ सालों से म्यूचुअल फंड सेक्टर इसी तरह की मुश्किलों का सामना कर रहा है, और विभिन्न फंड हाउसेस की ज्यादातर इंटरनेशनल स्कीम्स भी इन्हीं रेगुलेटरी बाधाओं के कारण नए निवेश के लिए बंद हो चुकी हैं। जो निवेशक इंटरनेशनल डाइवर्सिफिकेशन में रुचि रखते हैं, उन्हें या तो दूसरे रास्तों पर विचार करना होगा या फंड हाउस की भविष्य की घोषणाओं पर नजर रखनी होगी। यह तब संभव होगा जब रेडम्पशन (redemption) पैटर्न या $7 बिलियन की सीमा में कोई बदलाव हो।
