Edelweiss Gold and Silver ETF Fund of Funds (FoF) ने पिछले 6 महीनों में **7.4%** का शानदार रिटर्न दिया है। इसने Kotak Gold Fund और SBI Gold Fund जैसे बड़े खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, इस फंड में सिल्वर (Silver) का एक्सपोजर होने से प्योर गोल्ड फंड्स की तुलना में इसमें थोड़ी ज्यादा वोलेटिलिटी (Volatility) देखने को मिल सकती है।
क्या हुआ?
Edelweiss Gold and Silver ETF Fund of Funds (FoF) पिछले छह महीनों में गोल्ड म्यूचुअल फंड कैटेगरी में सबसे अव्वल साबित हुआ है। 24 जून 2026 तक इस फंड ने 7.4% का रिटर्न दिया है, जो कि अपने साथियों की तुलना में काफी बेहतर है। उदाहरण के तौर पर, इसी अवधि में Kotak Gold Fund और SBI Gold Fund का रिटर्न क्रमशः 3.9% और 3.8% रहा। यह आंकड़े उन फंड्स पर आधारित हैं जिनका असेट बेस ₹1,500 करोड़ से ज्यादा है, ताकि तुलना विश्वसनीय हो सके।
साथियों के मुकाबले परफॉरमेंस
हालांकि Edelweiss फंड ने छह महीने के रिटर्न में बाजी मारी है, निवेशक अक्सर फंड के आकार को स्थिरता का पैमाना मानते हैं। इस कैटेगरी के टॉप पांच फंड्स में SBI Gold Fund सबसे बड़ा फंड है, जिसका असेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹16,532.9 करोड़ है। बड़े फंड्स आम तौर पर बेहतर लिक्विडिटी (Liquidity) प्रदान करते हैं, जबकि Edelweiss जैसे छोटे फंड अपने खास पोर्टफोलियो की वजह से ज्यादा आक्रामक रिटर्न दिखा सकते हैं।
गोल्ड और सिल्वर का अंतर
निवेशकों के लिए यह समझना ज़रूरी है कि Edelweiss फंड सिर्फ गोल्ड फंड नहीं है। यह एक ETF Fund of Funds (FoF) है जो गोल्ड और सिल्वर दोनों में एक्सपोजर देता है। आमतौर पर, सिल्वर गोल्ड की तुलना में ज्यादा वोलेटाइल होता है, यानी इसमें कीमतों में उतार-चढ़ाव (Sharp Price Swings) ज्यादा देखने को मिलता है। यही वजह है कि इस फंड के रिटर्न पारंपरिक गोल्ड-ओनली फंड्स से काफी अलग हो सकते हैं। जब ग्लोबल सिल्वर की डिमांड बदलती है या इसके इंडस्ट्रियल उपयोग में कोई बदलाव आता है, तो इस फंड के प्रदर्शन पर असर प्योर गोल्ड इन्वेस्टमेंट से अलग पड़ेगा।
ऐतिहासिक रिटर्न और वोलेटिलिटी
लंबे समय में इस फंड ने शानदार ग्रोथ दिखाई है, जहां एक साल का रिटर्न 75.2% और तीन साल का रिटर्न 40.3% रहा है। ये आंकड़े अपने संबंधित बेंचमार्क से काफी बेहतर हैं। हालांकि, कमोडिटी-आधारित फंड्स के इन ऊंचे ऐतिहासिक रिटर्नों को देखते समय निवेशकों को सावधान रहना चाहिए। गोल्ड और सिल्वर की कीमतें ग्लोबल मैक्रोइकॉनॉमिक (Macroeconomic) फैक्टर्स से तय होती हैं, जैसे सेंट्रल बैंक की नीतियां, महंगाई और करेंसी मूवमेंट। अतीत का अच्छा रिटर्न भविष्य में भी वैसे ही नतीजे देगा, इसकी गारंटी नहीं है, खासकर अगर धातुओं की कीमतों में गिरावट आती है।
निवेशकों को क्या ध्यान देना चाहिए?
इस फंड में निवेश करने वाले निवेशकों को कुछ बातों पर नज़र रखनी चाहिए। सबसे पहले, फंड के एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio) का मूल्यांकन करें, जो फंड को मैनेज करने की सालाना लागत होती है। FoFs में अक्सर अंडरलाइंग ETF इन्वेस्टमेंट के कारण थोड़ी ज्यादा लागत आती है। दूसरा, गोल्ड और सिल्वर की कीमतों के बीच के अंतर (Divergence) पर ध्यान दें। चूंकि फंड में दोनों धातुएं हैं, इसका प्रदर्शन दोनों पर निर्भर करेगा। अंत में, याद रखें कि कमोडिटी फंड्स में शॉर्ट-टर्म परफॉरमेंस के आंकड़े अस्थिर हो सकते हैं। लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों के लिए शॉर्ट-टर्म रिटर्न रैंकिंग का पीछा करने के बजाय अंडरलाइंग एसेट क्लास के जोखिमों को समझना ज्यादा फायदेमंद होता है।
