पैसिव इन्वेस्टिंग की धूम के बीच नई AMC
भारत में पैसिव इन्वेस्टिंग (Passive Investing) की धूम के बीच एक नई एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) ने बाज़ार में दस्तक दी है। Benchmark AMC के संस्थापक, जिन्होंने भारत का पहला ETF (Exchange Traded Fund) लॉन्च किया था, अब Lakshya AMC के नाम से म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में 15 साल बाद वापसी कर रहे हैं। उन्हें रेगुलेटरी मंज़ूरी मिल गई है और वे पैसिव इन्वेस्टिंग के बढ़ते चलन का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बता दें कि दिसंबर 2025 तक भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹80.23 लाख करोड़ को पार कर गया था, जिसमें पैसिव फंड्स का हिस्सा ₹14.20 लाख करोड़ (करीब 18%) था। पिछले साल के मुकाबले इसमें 31% की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है।
Lakshya AMC का क्वांट (Quant) पर दांव
Lakshya AMC की सबसे बड़ी खासियत इसकी अपनी खास क्वांट (Quantitative) स्ट्रैटेजी होगी। कंपनी के फाउंडिंग पार्टनर Rajan Mehta बताते हैं कि उनका क्वांट तरीका केवल शेयर चुनने से ज़्यादा, एक फॉर्मूले से मुश्किल समस्याओं को हल करने पर केंद्रित है। उनका ध्यान स्ट्रक्चर्ड, इंडेक्स-बेस्ड सॉल्यूशंस पर होगा ताकि वे बाज़ार के उन गैप्स को भर सकें जहां अभी ज़रूरतें पूरी नहीं हुई हैं। यह न केवल उनकी पुरानी सफलताओं जैसे Nifty BeES और Liquid BeES की तरह होगा, बल्कि बाज़ार में नएपन लाने का प्रयास भी करेगा। सबसे खास बात यह है कि Lakshya AMC अहमदाबाद (Ahmedabad) से पहली म्यूचुअल फंड हाउस होगी।
भारतीय म्यूचुअल फंड बाज़ार में कड़ी टक्कर
भले ही पैसिव फंड्स का बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन इसमें बड़े और स्थापित प्लेयर्स का दबदबा है। SBI Mutual Fund पैसिव AUM में ₹3.73 लाख करोड़ के साथ सबसे आगे है, जिसके बाद Nippon India Mutual Fund (₹1.95 लाख करोड़) और UTI Mutual Fund (₹1.60 लाख करोड़) का नंबर आता है। Zerodha और Groww जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स भी इस स्पेस में अच्छी-खासी हिस्सेदारी रखते हैं। पिछले कैलेंडर वर्ष 2025 में नवंबर तक पैसिव फंड्स में ₹1.35 लाख करोड़ से ज़्यादा का निवेश आया है। हालांकि, फ्लेक्सी-कैप और मिड-कैप जैसे एक्टिव फंड्स कैटेगरीज़ ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है, जो दर्शाता है कि निवेशक दोनों तरह के ऑप्शंस में दिलचस्पी ले रहे हैं। आज के समय में निवेशक कम लागत वाले, पारदर्शी और नियमों पर आधारित निवेश के तरीकों को ज़्यादा पसंद कर रहे हैं।
आर्थिक कारक और निवेशकों का मूड
बाज़ार की चाल और निवेशकों का भरोसा काफी हद तक ब्याज दरों (Interest Rates) पर निर्भर करता है। बढ़ती दरें कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा कर सकती हैं और शेयर बाज़ार को धीमा कर सकती हैं। वहीं, घटती दरें इक्विटी के लिए अच्छी मानी जाती हैं। बाज़ार की अनिश्चितता (Volatility) निवेशकों को पैसिव फंड्स की ओर धकेलती है, क्योंकि उन्हें इनमें ज़्यादा सुरक्षा और कम लागत का अहसास होता है। विश्लेषकों को उम्मीद है कि पैसिव इन्वेस्टिंग का यह चलन आगे भी जारी रहेगा।
नई AMCs के लिए राह आसान नहीं
भारत में एक नई एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) लॉन्च करना आसान नहीं है। बाज़ार में पहले से ही 47 खिलाड़ी मौजूद हैं, और नए लोगों को ब्रेक-ईवन तक पहुँचने में अक्सर 5-6 साल या उससे ज़्यादा लग जाते हैं। मुनाफ़ा मुख्य रूप से स्थापित ब्रांड्स के पास ही सिमटा हुआ है। SEBI की बढ़ती निगरानी, जैसे कि फ्रंट-रनिंग और इनसाइडर ट्रेडिंग पर कड़े नियम, छोटे फर्मों के लिए ऑपरेशनल लागत और जटिलताएँ बढ़ा सकते हैं। एक विश्वसनीय ट्रैक रिकॉर्ड बनाने में 7-10 साल तक का समय लग सकता है।
Lakshya AMC का आगे का रास्ता
Lakshya AMC एक ऐसे गतिशील और तेज़ी से बढ़ते भारतीय म्यूचुअल फंड बाज़ार में कदम रख रही है, खासकर पैसिव सेगमेंट में। कंपनी का इनोवेशन और गैप्स की पहचान पर ज़ोर, साथ ही इसके संस्थापकों का अनुभवी अनुभव, इसे एक खास पहचान दिला सकता है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपनी अनूठी क्वांट स्ट्रैटेजी को कितनी अच्छी तरह लागू कर पाते हैं और इस प्रतिस्पर्धी व रेगुलेटेड बाज़ार में कैसे टिक पाते हैं। लॉन्च अगले तीन महीनों के अंदर होने की उम्मीद है, जिसका लक्ष्य इंटरमीडियरीज़ के ज़रिए व्यापक वितरण होगा।