Indian Mutual Funds का नया दांव: विदेशी इक्विटी में **27%** तक निवेश, पर ध्यान दें ये बातें!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Mutual Funds का नया दांव: विदेशी इक्विटी में **27%** तक निवेश, पर ध्यान दें ये बातें!

भारतीय म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) निवेशकों को अब अपने पोर्टफोलियो में विदेशी शेयर (Global Equities) शामिल करने का एक नया तरीका मिल रहा है। कई डोमेस्टिक फंड्स अब **27%** तक विदेशी इक्विटी में निवेश कर रहे हैं, खासकर टेक (Tech) और मल्टी-एसेट फंड्स में। यह निवेशकों के लिए भौगोलिक विविधीकरण (Geographic Diversification) का एक जरिया है, लेकिन इसमें कुछ खास बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है।

डोमेस्टिक स्कीम्स से ग्लोबल एक्सपोजर का नया रास्ता

भारतीय निवेशकों के लिए अपने पोर्टफोलियो को घरेलू बाजार से आगे बढ़कर विविधीकृत (Diversify) करने का रास्ता अब थोड़ा पेचीदा हो गया है। दरअसल, विदेशी निवेश (Overseas Investments) पर लगी रेगुलेटरी लिमिट्स के चलते कई डेडिकेटेड इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड्स में नए निवेश पर रोक लग गई है। ऐसे में, एक नया ट्रेंड सामने आया है। कई डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड स्कीम्स अब अपने पोर्टफोलियो में विदेशी शेयरों (Foreign Equities) को शामिल कर रही हैं, जिससे निवेशक बिना किसी खास इंटरनेशनल फंड में निवेश किए ग्लोबल मार्केट का एक्सपोजर पा सकते हैं।

डोमेस्टिक फंड्स में विदेशी निवेश की बढ़ती मांग

जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, यह रणनीति काफी लोकप्रिय हो रही है। इस अवधि तक, 15 डोमेस्टिक स्कीम्स ने अपने एसेट्स (Assets) का 10% से अधिक हिस्सा विदेशी शेयरों में लगाया हुआ था। यह ट्रेंड खास तौर पर टेक्नोलॉजी (Technology) और मल्टी-एसेट फंड्स (Multi-Asset Funds) में देखा जा रहा है, जो खास मार्केट ऑपर्च्युनिटीज (Market Opportunities) का फायदा उठाने के लिए ग्लोबल होल्डिंग्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, Edelweiss Technology Fund ने 26.8% विदेशी इक्विटी में निवेश किया है, जबकि ICICI Prudential Passive Multi-Asset FoF का एक्सपोजर 26.6% है। Franklin India Technology Fund जैसे फंड्स में भी लगभग 20.5% का महत्वपूर्ण विदेशी निवेश है।

इस बदलाव से निवेशकों को भारतीय म्यूचुअल फंड्स के ढांचे के भीतर ही ग्लोबल टेक दिग्गजों और इंटरनेशनल कंपनियों में निवेश का मौका मिल रहा है। Kotak Pioneer, DSP Healthcare, और Axis Innovation जैसे फंड्स ने भी 14% से लेकर 19% तक का विदेशी निवेश शामिल किया है। यहाँ तक कि SBI Children's Investment Plan और Parag Parikh Flexi Cap Fund जैसे कुछ डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स (Diversified Equity Funds) ने भी ग्लोबल ज्योग्राफिक स्प्रेड (Global Geographic Spread) जोड़ने के लिए विदेशी शेयर खरीदे हैं।

निवेशकों के लिए यह क्यों मायने रखता है?

यह उपाय मुख्य रूप से इंडस्ट्री-व्यापी रेगुलेटरी सीलिंग (Regulatory Ceilings) का परिणाम है, जिसने फंड हाउसेज की प्योर इंटरनेशनल फंड्स में नए पैसे स्वीकार करने की क्षमता को सीमित कर दिया है। भले ही कुछ फंड हाउसेज ने सीमित ट्रांजैक्शंस (Limited Transactions) के लिए चुनिंदा ओवरसीज स्कीम्स को फिर से खोला है, लेकिन ज्यादातर निवेशकों के लिए एक्सेस अभी भी प्रतिबंधित है। नतीजतन, ये डोमेस्टिक-फोकस्ड स्कीम्स फिलहाल कई लोगों के लिए ग्लोबल एसेट्स को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करने का मुख्य जरिया बनी हुई हैं।

हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह ग्लोबल एक्सपोजर अक्सर खास थीम्स (Specific Themes) में केंद्रित होता है। इनमें से कई फंड या तो टेक्नोलॉजी-फोक्स्ड (Technology-Focused) हैं या थीमेटिक (Thematic), जिसका मतलब है कि उनकी विदेशी होल्डिंग्स आमतौर पर ग्लोबल कंपनियों के ब्रॉड इंडेक्स (Broad Index) के बजाय खास सेक्टर्स (Specific Sectors) तक सीमित होती हैं। नतीजतन, इन फंड्स का प्रदर्शन ग्लोबल इक्विटी मार्केट्स के अलावा, उनके ट्रैक किए जा रहे खास सेक्टर पर बहुत हद तक निर्भर करता है।

ध्यान रखने योग्य जोखिम

निवेशकों को इन फंड्स पर ग्लोबल एक्सपोजर के लिए निर्भर रहने में निहित जोखिमों से अवगत रहना चाहिए। सबसे पहले, इसमें कंसंट्रेशन रिस्क (Concentration Risk) है; चूंकि ये फंड अक्सर टेक्नोलॉजी या खास थीम्स पर ध्यान केंद्रित करते हैं, इसलिए वे ब्रॉड-बेस्ड ग्लोबल डाइवर्सिफिकेशन (Broad-based Global Diversification) प्रदान नहीं करते हैं जो एक ग्लोबल इंडेक्स फंड (Global Index Fund) करता। यदि चुना गया सेक्टर मंदी का शिकार होता है, तो विदेशी होल्डिंग्स पोर्टफोलियो को नुकसान से बचाने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती हैं।

दूसरा, विदेशी इक्विटी निवेश करेंसी फ्लक्चुएशन्स (Currency Fluctuations) के अधीन हैं। यदि भारतीय रुपया विदेशी करेंसी के मुकाबले मजबूत होता है, तो उन निवेशों से होने वाला रिटर्न रुपये के मामले में उम्मीद से कम हो सकता है। तीसरा, ऑपरेशनल अनिश्चितता (Operational Uncertainty) है। इन डोमेस्टिक फंड्स की विदेशी एक्सपोजर बनाए रखने या बढ़ाने की क्षमता फंड हाउस के रेगुलेटरी लिमिट्स के तहत बचे हुए हेडरूम (Headroom) पर निर्भर करती है। यदि कोई फंड अपनी विदेशी निवेश सीमा तक पहुँच जाता है, तो उसे अपना विदेशी आवंटन बढ़ाना बंद करना पड़ सकता है, या यहाँ तक कि विनिवेश (Divest) भी करना पड़ सकता है, जो फंड की रणनीति को बदल सकता है।

अपने विदेशी आवंटन के आधार पर फंड चुनने से पहले, फंड की समग्र निवेश रणनीति, मैनेजमेंट के ट्रैक रिकॉर्ड और फंड की कॉस्ट स्ट्रक्चर (Cost Structure) का मूल्यांकन करना आवश्यक है। निवेशकों को इन विदेशी होल्डिंग्स को निवेश के प्राथमिक कारण के बजाय एक सेकेंडरी फीचर (Secondary Feature) के रूप में देखना चाहिए, यह सुनिश्चित करते हुए कि फंड के समग्र उद्देश्य अभी भी उनके व्यक्तिगत वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप हों।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.