जुलाई 2026 तक 25% से ज्यादा फोकस्ड म्यूचुअल फंड स्कीमों ने लार्जकैप IT शेयरों को अपने पोर्टफोलियो से बाहर कर दिया है। फंड मैनेजरों को TCS और Infosys जैसे दिग्गजों में AI के बढ़ते खतरे और खर्च में सुस्ती के कारण मुनाफे पर मार का डर सता रहा है।
भारतीय शेयर बाजार में म्यूचुअल फंड्स का नजरिया IT सेक्टर को लेकर पूरी तरह बदल गया है। जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, एक-चौथाई से ज्यादा फोकस्ड फंड्स ने अपने पोर्टफोलियो से लार्जकैप IT कंपनियों को पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखा दिया है। यह कदम बाजार के उन दिग्गजों के प्रति फंड मैनेजरों के गहरे अविश्वास को दर्शाता है।
क्यों नहीं खरीद रहे फंड मैनेजर?
Nifty IT इंडेक्स में आई भारी गिरावट के बाद वैल्यूएशन कई साल के निचले स्तर पर है, लेकिन फंड हाउस खरीदने की जल्दबाजी नहीं दिखा रहे हैं। SBI Focused Fund और Old Bridge Focused Fund जैसे बड़े नाम अब इन शेयरों में जीरो एक्सपोजर रखते हैं। मैनेजरों का मानना है कि मौजूदा गिरावट के बावजूद सेक्टर के स्ट्रक्चरल रिस्क अभी भी बने हुए हैं।
AI का डर और ग्लोबल सुस्ती
निवेशकों की चिंता का सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है। बाजार को डर है कि AI-लेड ऑटोमेशन से कंपनी की मौजूदा मार्जिन वाली सर्विस पर असर पड़ सकता है, या फिर नए मॉडल अपनाने में आने वाली लागत मुनाफे को कम कर सकती है। इसके अलावा, विदेशी ग्राहकों द्वारा गैर-जरूरी IT प्रोजेक्ट्स में कटौती से रेवेन्यू ग्रोथ पर भी दबाव है।
क्या है 'वैल्यू ट्रैप' का खतरा?
कुछ एक्सपर्ट्स को यह डर है कि ये स्टॉक कहीं 'वैल्यू ट्रैप' न बन जाएं। इसका मतलब है कि स्टॉक अपने अर्निंग्स के मुकाबले सस्ते तो दिख रहे हैं, लेकिन ग्रोथ न होने की वजह से शेयर की कीमत लंबे समय तक नीचे ही रह सकती है। आने वाले क्वार्टरली नतीजों में अगर कंपनियां AI से अपनी बॉटम लाइन बढ़ाती हुई दिखती हैं, तभी फंड मैनेजरों का भरोसा वापस लौटने की उम्मीद की जा सकती है।
