रेगुलर म्यूचुअल फंड (Regular Mutual Funds) में डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन शामिल होता है, जिससे आपके रिटर्न्स पर असर पड़ता है। वहीं, डायरेक्ट प्लान (Direct Plans) लागत कम करके वेल्थ बनाने में मदद करते हैं, लेकिन स्विच करने से पहले टैक्स और एग्जिट लोड का हिसाब लगाना बहुत जरूरी है।
भारत में म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय अक्सर निवेशक 'रेगुलर' और 'डायरेक्ट' प्लान के बीच उलझ जाते हैं। हकीकत यह है कि दोनों प्लान एक ही पोर्टफोलियो में निवेश करते हैं, एक ही फंड मैनेजर द्वारा मैनेज किए जाते हैं और रिस्क लेवल भी एक जैसा होता है। इनका मुख्य अंतर केवल यह है कि आप फंड तक कैसे पहुँचते हैं और उस प्रक्रिया की लागत क्या है।\n\n### रेगुलर प्लान की छिपी लागत\n\nरेगुलर प्लान में एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) उस एजेंट या प्लेटफॉर्म को कमीशन देती है जिसने फंड बेचा है। यह खर्च 'टोटल एक्सपेंस रेश्यो' (TER) में शामिल होता है। क्योंकि यह कमीशन TER का हिस्सा है, इसे हर दिन फंड की नेट एसेट वैल्यू (NAV) से काट लिया जाता है। लंबी अवधि में, कंपाउंडिंग (Compounding) के कारण यह छोटी सी कटौती आपके फाइनल कॉर्पस पर बहुत बड़ा असर डालती है।\n\n### डायरेक्ट प्लान: कम खर्चे का फायदा\n\nSEBI के आदेशानुसार, 2013 में शुरू किए गए डायरेक्ट प्लान में बीच के बिचौलिए (Distributor) हट जाते हैं। सीधे फंड हाउस या डायरेक्ट प्लेटफॉर्म से निवेश करने पर आपको 0.5% से 1% तक का सालाना एक्सपेंस रेश्यो कम देना पड़ता है। भले ही यह आंकड़ा सुनने में छोटा लगे, लेकिन 10 से 20 साल की लंबी अवधि में यह कंपाउंडिंग की बदौलत आपके मुनाफे में लाखों का अंतर पैदा कर सकता है।\n\n### स्विच करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान\n\nरेगुलर से डायरेक्ट प्लान में स्विच करना इतना आसान नहीं है जितना दिखता है। रेगुलेटरी नियमों के अनुसार, इसे यूनिट्स का रिडेम्पशन (Redemption) और नई खरीद माना जाता है। यहाँ आपको दो बड़े खर्चों का सामना करना पड़ सकता है:\n\n1. कैपिटल गेन्स टैक्स: यदि आपकी यूनिट्स पर फायदा हुआ है, तो स्विच करते ही शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म टैक्स लग सकता है।\n2. एग्जिट लोड: कई स्कीम्स में 1 साल से पहले पैसा निकालने पर जुर्माना लगता है।\n\nस्विच करने से पहले यह कैलकुलेशन जरूर करें कि क्या टैक्स और पेनल्टी बचाने वाली बचत से ज्यादा तो नहीं है। अंत में, सलाह यही है कि अगर आप अपना पोर्टफोलियो खुद मैनेज कर सकते हैं, तो डायरेक्ट प्लान बेहतर हैं। लेकिन अगर आपको मार्केट में उतार-चढ़ाव के दौरान प्रोफेशनल सलाह की जरूरत है, तो रेगुलर प्लान में दी जाने वाली फीस आपकी सुविधा की कीमत हो सकती है।
