130 डेट म्यूचुअल फंड स्कीमों के एक अध्ययन से पता चला है कि कम से कम तीन साल तक निवेश बनाए रखने से महंगाई (Inflation) को मात देने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हालांकि, 2023 के टैक्स बदलावों के बाद डेट फंड्स के मायने बदल गए हैं, लेकिन सही समय के साथ ये आज भी पूंजी सुरक्षित रखने का बेहतर विकल्प हैं।
भारत में ज्यादातर निवेशक डेट म्यूचुअल फंड्स (Debt Mutual Funds) को केवल सरप्लस कैश पार्क करने की जगह मानते हैं। लेकिन, 130 अलग-अलग स्कीमों का डेटा एक अलग ही कहानी बयां करता है। अगर आप अपने पैसे को महंगाई के असर से बचाना चाहते हैं, तो 'समय' ही आपका सबसे बड़ा हथियार है। डेटा के अनुसार, केवल 46% स्कीम्स ही एक साल के पीरियड में महंगाई (CPI) से ज्यादा रिटर्न दे पाईं, लेकिन जब होल्डिंग पीरियड 3 साल का किया गया, तो सफलता की दर 100% तक पहुंच गई।
RBI की पॉलिसी और उतार-चढ़ाव
डेट फंड्स का प्रदर्शन सीधे तौर पर Reserve Bank of India (RBI) की ब्याज दरों से जुड़ा है। जब केंद्रीय बैंक महंगाई काबू करने के लिए दरें बढ़ाता है, तो शॉर्ट टर्म में बॉन्ड की कीमतें गिरती हैं, जिसे 'मार्क-टू-मार्केट' (Mark-to-market) नुकसान कहा जाता है। 2022 के बाद के दौर में Gilt Funds में यही देखने को मिला था। हालांकि, एक पूरे इकोनॉमिक साइकिल में फंड मैनेजर्स को ऊंची दरों पर दोबारा निवेश (Reinvest) करने का मौका मिलता है, जिससे पोर्टफोलियो रिकवर होकर महंगाई दर से ऊपर निकल जाता है।
टैक्स का गणित
अप्रैल 2023 के बाद से टैक्स नियमों में हुए बदलाव ने पूरी तस्वीर बदल दी है। अब इंडेक्सेशन (Indexation) बेनिफिट खत्म होने के बाद डेट फंड्स से होने वाली कमाई पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इससे बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के मुकाबले डेट फंड्स का पुराना टैक्स एडवांटेज लगभग खत्म हो गया है। इसीलिए, हाई टैक्स ब्रैकेट वाले निवेशकों को अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
सही फंड का चुनाव
सभी डेट फंड्स एक जैसे नहीं होते। Banking and PSU debt funds और Corporate bond funds ने ऐतिहासिक रूप से महंगाई से 1% से 3% ज्यादा रिटर्न देने की क्षमता दिखाई है। वहीं, Short Duration funds ब्याज दरों के बदलावों के बीच स्थिरता देते हैं, जबकि Credit Risk funds में जोखिम ज्यादा होता है। निवेश का मूल मंत्र यही है कि आपका पैसा महंगाई की रफ्तार से तेज बढ़े। अपने फंड की मैच्योरिटी प्रोफाइल को अपने फाइनेंशियल गोल्स के साथ मिलाकर ही निवेश का फैसला लें।
