DSP Mutual Fund की हालिया 'Netra' रिपोर्ट में म्यूचुअल फंड के लुभावने रिटर्न्स और निवेशकों की वास्तविक कमाई के बीच बड़ा गैप उजागर हुआ है। डेटा बताता है कि स्मॉल-कैप फंड्स ने **14.8%** CAGR दिया, फिर भी निवेशक नुकसान में रहे, क्योंकि अधिकांश लोगों ने बाजार में तेजी के बाद निवेश किया।
DSP Mutual Fund की नई 'Netra' रिपोर्ट (सितंबर 2026) ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के उस कड़वे सच को सामने रखा है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। फंड हाउस जो रिटर्न दिखाते हैं, वह एक स्थिर निवेश पर आधारित होता है, जबकि रिटेल निवेशक बाजार की चाल देखकर पैसा लगाते हैं। इसी वजह से 'मनी-वेटेड' रिटर्न और 'टाइम-वेटेड' रिटर्न के बीच भारी अंतर पैदा हो जाता है।
स्मॉल-कैप का उदाहरण
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2013 से जून 2020 के बीच स्मॉल-कैप कैटेगरी ने 14.8% का CAGR दिया। लेकिन, इस दौरान निवेशकों का वास्तविक रिटर्न -1.6% रहा। यह 16.4% का बड़ा अंतर बताता है कि अधिकांश निवेशकों ने सही समय पर पैसा नहीं लगाया।
क्यों चूक जाते हैं निवेशक?
निवेशक अक्सर किसी कैटेगरी में तब पैसा लगाते हैं जब उसने पहले ही शानदार प्रदर्शन कर लिया होता है। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2013 से दिसंबर 2017 के बीच ₹17,000 करोड़ आए, लेकिन जनवरी 2018 से जून 2020 के बीच (जब बाजार में गिरावट आई), ₹27,000 करोड़ का बड़ा निवेश आया। यानी ज्यादातर पैसा तब लगा जब वैल्यूएशन बहुत महंगा था।
अन्य सेक्टर्स का हाल
यह ट्रेंड सिर्फ स्मॉल-कैप तक सीमित नहीं है:
- टेक्नोलॉजी फंड्स: जुलाई 2019 से जुलाई 2026 के बीच 17% CAGR के मुकाबले निवेशकों को केवल 7.6% रिटर्न मिला।
- इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स: यहां स्थिति और भी खराब थी, जहां 33.8% के कैटेगरी रिटर्न के सामने निवेशकों को सिर्फ 6.2% रिटर्न ही हासिल हुआ।
निवेशकों के लिए सबक
म्यूचुअल फंड की पिछली परफॉरमेंस को देखकर उसमें कूद पड़ना आपकी वेल्थ क्रिएशन की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है। रिपोर्ट का स्पष्ट संदेश है कि बाजार को टाइम करने के बजाय, बाजार में अनुशासित रहकर निवेश करना (SIP मोड) ही लॉन्ग टर्म में जोखिम को कम करता है और मुनाफे की संभावना को बढ़ाता है।
