DSP Mutual Fund की एग्जीक्यूटिव अपर्णा कार्णिक ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे बेस्ट परफॉर्मिंग एसेट्स के पीछे भागकर मार्केट टाइम करने की कोशिश न करें। इसके बजाय, एक अनुशासित मल्टी-एसेट स्ट्रेटेजी अपनाएं ताकि पोर्टफोलियो आर्थिक उतार-चढ़ाव को झेल सके।
भारतीय निवेशकों में अक्सर यह होड़ रहती है कि कौन सा स्टॉक या सेक्टर सबसे ज्यादा रिटर्न देगा, और इसी चक्कर में वे बार-बार अपना पोर्टफोलियो बदलते रहते हैं। DSP Mutual Fund में हेड ऑफ क्वांटिटेटिव इन्वेस्टमेंट्स एंड एनालिटिक्स, अपर्णा कार्णिक का मानना है कि 'विनर्स' के पीछे भागने की यह आदत लंबे समय में वेल्थ क्रिएशन के बजाय जोखिम बढ़ाती है।\n\nकार्णिक के अनुसार, भविष्य की आर्थिक हलचलों का सटीक अंदाजा लगाने के बजाय एक ऐसा पोर्टफोलियो बनाना जरूरी है जो महंगाई, ब्याज दरों में बदलाव या भू-राजनीतिक तनाव जैसी स्थितियों में भी स्थिर रहे।\n\n### 'कोर-प्लस-टैक्टिकल' अप्रोच\n\nबाजार के उतार-चढ़ाव को मैनेज करने के लिए DSP Mutual Fund 'कोर-प्लस-टैक्टिकल' एलोकेशन मॉडल का उपयोग करता है। इसमें पोर्टफोलियो का 50% से 70% हिस्सा इक्विटी में रखा जाता है जो ग्रोथ का इंजन है। बाकी हिस्सा सोने, कमोडिटी (मुद्रास्फीति से बचाव के लिए) और फिक्स्ड इनकम जैसे एसेट्स में निवेश किया जाता है। यह मॉडल वैल्युएशन पर आधारित है—जब बाजार बहुत महंगा हो जाता है, तो जोखिम कम किया जाता है और जब सुरक्षा का मार्जिन मिलता है, तो निवेश बढ़ाया जाता है।\n\n### डाइवर्सिफिकेशन का असली मतलब\n\nअक्सर निवेशक अलग-अलग सेक्टर या कई इक्विटी फंड्स को डाइवर्सिफिकेशन मान लेते हैं, लेकिन कार्णिक इसे गलत बताती हैं। बाजार में बड़ी गिरावट के समय लगभग सभी इक्विटी फंड्स एक साथ गिरते हैं। असली बचाव तब होता है जब आप एसेट-क्लास लेवल पर डाइवर्सिफिकेशन करते हैं—जैसे इक्विटी, डेट और गोल्ड का सही मिश्रण।\n\n### क्या देखें निवेशक?\n\nनिवेशकों को सिर्फ हेडलाइन रिटर्न देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए। कोई फंड बुल मार्केट में अच्छा दिख सकता है लेकिन उसमें छिपा जोखिम बहुत ज्यादा हो सकता है। एक बेहतर रणनीति वह है जो बाजार की तेजी के पीछे भागने के बजाय उतार-चढ़ाव के दौरान पूंजी को सुरक्षित रखने पर केंद्रित हो।
