DSP Mutual Fund ने मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स को लेकर निवेशकों को नई सलाह दी है। इसे सिर्फ सोने या इक्विटी में शॉर्ट-टर्म दांव लगाने का जरिया न समझें, बल्कि पोर्टफोलियो का मजबूत आधार मानें।
नजरिया बदलें, मुनाफा पाएं
DSP Mutual Fund अब निवेशकों को यह समझाने पर जोर दे रहा है कि मल्टी-एसेट फंड्स केवल सोने, चांदी या किसी सेक्टर विशेष में तेजी का फायदा उठाने का शॉर्ट-टर्म जरिया नहीं हैं। अक्सर निवेशक बाजार को 'टाइम' करने की कोशिश करते हैं और कमोडिटी या इक्विटी में रैली देखते ही इन फंड्स में पैसा डालते हैं, जो कि इनकी मूल संरचना के खिलाफ है।
रिस्क कम, रिटर्न की उम्मीद अधिक
मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स का मुख्य काम अलग-अलग एसेट क्लासेस जैसे डोमेस्टिक और ग्लोबल इक्विटी, डेट इंस्ट्रूमेंट्स, कमोडिटीज और कभी-कभी REITs में निवेश करके जोखिम को कम करना है। जब इक्विटी मार्केट दबाव में होता है, तो सोना या डेट मार्केट एक कुशन (Cushion) का काम करते हैं। उदाहरण के लिए, DSP Multi Asset Allocation Fund का एसेट बेस लगभग ₹10,592 करोड़ तक पहुंच चुका है, जो इस तरह की संतुलित रणनीतियों के प्रति निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। साल 2026 की पहली तिमाही में, मल्टी-एसेट फंड्स ने इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीम्स में आए कुल इनफ्लो का लगभग 27% हिस्सा अपनी ओर खींचा है।
सावधानियां और रिस्क फैक्टर
निवेशकों को यह समझना चाहिए कि ये फंड्स जोखिम-मुक्त नहीं हैं। इनका रिस्क प्रोफाइल 'वेरी हाई' (Very High) की श्रेणी में आता है। सबसे बड़ा अंतर यह है कि अगर बाजार में बड़ी तेजी (Bull Run) आती है, तो ये फंड्स प्योर इक्विटी पोर्टफोलियो से पीछे रह सकते हैं, क्योंकि इन्हें डेट और कमोडिटीज में भी हिस्सा बनाए रखना पड़ता है। इसके अलावा, इनका प्रदर्शन पूरी तरह से फंड मैनेजर की एसेट एलोकेशन कुशलता पर निर्भर करता है।
निवेशकों के लिए सलाह
अगर आप इन फंड्स में निवेश करना चाहते हैं, तो छोटे समय के लिए न सोचें। इन फंड्स का मकसद पूरे इकोनॉमिक साइकिल के दौरान संतुलित रिटर्न देना है। शॉर्ट-टर्म की उठा-पटक के बजाय, फंड का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड देखें कि उसने बाजार की गिरावट के दौरान रिस्क को कैसे मैनेज किया है।
