DSP Healthcare Fund ने पिछले 3 महीनों में **13.4%** का शानदार रिटर्न देकर हेल्थकेयर सेक्टर में टॉप परफॉर्मर का ताज पहना है। हालांकि, यह शॉर्ट-टर्म में अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे निकल गया, लेकिन SBI Healthcare Opportunities Fund जैसे फंड्स की लंबी अवधि की कंसिस्टेंसी और सेक्टर-स्पेसिफिक फंड्स से जुड़े हाई रिस्क पर भी गौर करना जरूरी है।
DSP Healthcare Fund का जलवा!
पिछले 3 महीनों के दौरान, DSP Healthcare Fund ने 13.4% का रिटर्न दर्ज किया है, जो इसे हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर के म्यूचुअल फंड्स में सबसे आगे रखता है। इसी अवधि में, SBI Healthcare Opportunities Fund ने 12.1% का रिटर्न दिया, जबकि Mirae Asset Healthcare Fund 7.6% पर रहा। यह आंकड़ा 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाले फंड्स पर आधारित है और यह दिखाता है कि इस सेक्टर में कितनी तेजी से शॉर्ट-टर्म में मुनाफा कमाया जा सकता है।
लंबी अवधि में कौन बेहतर?
हालांकि DSP Healthcare Fund ने हाल के 3 महीनों में दमदार परफॉर्मेंस दिखाई है, लेकिन लंबी अवधि के चार्ट को देखें तो बाजी पलट जाती है। SBI Healthcare Opportunities Fund पिछले 6 महीने, 1 साल और 3 साल की अवधि में लगातार बेहतर प्रदर्शन करता आ रहा है। इसके 3-साल के रिटर्न 23.0% रहे हैं, जो यह बताते हैं कि निवेशकों को किसी भी फंड को जज करने के लिए सिर्फ छोटी अवधि के नतीजों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
सेक्टर फंड्स के अपने रिस्क!
सेक्टोरल फंड्स में निवेश, डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स से कहीं ज्यादा रिस्की होता है। SEBI के नियमों के मुताबिक, इन स्कीम्स को अपने एसेट्स का कम से कम 80% फार्मा और हेल्थकेयर कंपनियों में लगाना पड़ता है। इस मजबूरी के चलते फंड का प्रदर्शन सीधे तौर पर इस एक इंडस्ट्री के हेल्थ पर निर्भर करता है। अगर फार्मा सेक्टर पर किसी भी तरह की मुश्किल आती है, जैसे कि प्राइसिंग कंट्रोल, कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, या अमेरिका जैसे बड़े एक्सपोर्ट मार्केट में रेगुलेटरी एक्शन, तो इन फंड्स में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
फंड का साइज़ भी मायने रखता है
फंड के साइज़ की बात करें तो Nippon India Pharma Fund सबसे बड़े फंड्स में से एक है, जिसका कुल प्रबंधन 9,279 करोड़ रुपये है। वहीं, DSP Healthcare Fund का पोर्टफोलियो करीब 3,639 करोड़ रुपये का है। छोटे फंड्स अक्सर स्टॉक पिकिंग में ज्यादा फ्लेक्सिबल हो सकते हैं, लेकिन उनके पोर्टफोलियो के आधार पर लिक्विडिटी की समस्या भी आ सकती है।
आगे क्या?
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि हेल्थकेयर सेक्टर में हालिया तेजी शायद लंबे समय तक न टिक पाए। यह सेक्टर बाहरी नीतियों और ग्लोबल सप्लाई चेन में होने वाले बदलावों के प्रति बहुत संवेदनशील है, जिससे यह ब्रॉडर मार्केट इंडेक्स की तुलना में ज्यादा वोलेटाइल रहता है। ऐसे में, इन थीमेटिक फंड्स में निवेश करने वाले निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे 7 से 10 साल का लंबा निवेश होराइजन रखें ताकि मार्केट के उतार-चढ़ाव का सामना कर सकें। निवेशकों को फंड मैनेजर्स की रेगुलेटरी चुनौतियों से निपटने और विभिन्न मार्केट साइकल में कंसिस्टेंसी बनाए रखने की क्षमता पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
