DSP MF की नई चाल: लार्ज-कैप पर दांव, स्मॉल-कैप से सावधान!

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AuthorAditya Rao|Published at:
DSP MF की नई चाल: लार्ज-कैप पर दांव, स्मॉल-कैप से सावधान!
Overview

DSP Mutual Fund अब भारतीय इक्विटी (Equities) पर बुलिश (Bullish) हो गया है। फंड हाउस का मानना है कि बैंकिंग, आईटी और हेल्थकेयर जैसे बड़े (Large-cap) शेयरों में वैल्यू दिख रही है। हालांकि, DSP MF ने मिड और स्मॉल-कैप शेयरों से सावधान रहने की सलाह दी है, जो फिलहाल बियर मार्केट (Bear Market) में हैं।

क्यों लार्ज-कैप पर दांव?

DSP MF के मुताबिक, हालिया करेक्शन के बाद Nifty 50 इंडेक्स का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 20.0-20.23 पर आ गया है, जो इसके लॉन्ग-टर्म एवरेज के करीब है। यह दर्शाता है कि बाजार कुछ हद तक अंडरवैल्यूड (Undervalued) है। फंड हाउस का यह भी मानना है कि अर्निंग्स-टू-बॉन्ड यील्ड गैप का ~1% तक कम होना इक्विटी के लिए ऐतिहासिक रूप से एक पॉजिटिव संकेत है। बाजार में गहरा निराशावाद (Pessimism) है, जैसा कि 15% से भी कम Nifty 500 स्टॉक अपने 200-day मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं।

मिड और स्मॉल-कैप से क्यों रहें दूर?

DSP MF ने मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों से दूरी बनाने की सलाह दी है। ये स्टॉक हाल की चोटियों से क्रमशः 13% और 20% से ज़्यादा गिर चुके हैं और बियर मार्केट टेरिटरी में पहुंच गए हैं। मार्केट की चौड़ाई (Breadth) बहुत खराब है, यानी 15% से भी कम स्टॉक अपने 200-day मूविंग एवरेज से ऊपर हैं, जो व्यापक निराशावाद और कम बाइंग सपोर्ट को दिखाता है।

ग्लोबल और डोमेस्टिक फैक्टर्स

वैश्विक स्तर पर, मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल रिस्क (Geopolitical Risks) और एनर्जी की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई (Inflation) बढ़ने और ग्रोथ पर असर पड़ने की चिंताएं हैं। Goldman Sachs ने भारत की 2026 की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाकर 5.9% कर दिया है। इसके अलावा, भारतीय रुपये पर डेप्रिसिएशन (Depreciation) का दबाव बना हुआ है।

सेक्टर पर फोकस

DSP MF का मानना है कि बैंकिंग, आईटी, हेल्थकेयर, इंश्योरेंस, हाउसिंग फाइनेंस और कुछ FMCG कंपनियों में अट्रैक्टिव वैल्यूएशन (Attractive Valuations) मिल रही है। Analysts ने Indian Bank को मजबूत फंडामेंटल्स के लिए, और Max Healthcare व Star Health & Allied Insurance को ग्रोथ के अवसरों और वैल्यूएशन के लिए 'Buy' रेटिंग दी है।

मुख्य चुनौतियां

बाजार के सामने जियोपॉलिटिकल अस्थिरता, एनर्जी सप्लाई में रुकावट का खतरा और रुपये का लगातार कमजोर होना जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। फंड हाउस की लार्ज-कैप पर बुलिशनेस इन चुनौतियों के बीच वैल्यू ढूंढने का संकेत देती है, लेकिन छोटे शेयरों में जारी गिरावट सावधानी बरतने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

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