DSP Mutual Fund के CEO कल्पेन पारेख ने निवेशकों को आगाह किया है। उन्होंने कहा कि अगर बाजार में लंबे समय तक सुस्ती रही, तो SIP का फ्लो प्रभावित हो सकता है। ऐसे में 'परफॉर्मेंस चेजिंग' के बजाय सही एसेट एलोकेशन पर ध्यान देना जरूरी है।
बाजार की हकीकत को समझें
भारत में रिटेल निवेश को आगे बढ़ाने में SIP ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है, लेकिन DSP Mutual Fund के MD और CEO कल्पेन पारेख ने एक अहम चिंता जाहिर की है। पारेख का मानना है कि अगर इक्विटी बाजार अगले 5 से 7 साल तक सुस्त बना रहता है या खराब रिटर्न देता है, तो इसका असर नए और पुराने निवेशकों के मनोबल पर पड़ेगा। हालांकि अभी लोग बाजार से बाहर नहीं निकल रहे हैं, लेकिन लगातार खराब प्रदर्शन मनोवैज्ञानिक बाधा पैदा कर सकता है।
बैलेंस्ड पोर्टफोलियो क्यों है जरूरी?
निवेशक अक्सर गलती करते हैं कि वे केवल इक्विटी को देखते हैं। पारेख के मुताबिक, पोर्टफोलियो ऐसा होना चाहिए जो आपके समय और जोखिम लेने की क्षमता के अनुरूप हो। यदि आप बाजार की गिरावट से घबराते हैं, तो आपको हाइब्रिड, मल्टी-एसेट या फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स में निवेश करना चाहिए। सोना, बॉन्ड और इक्विटी का सही तालमेल ही बाजार के खराब दौर में आपकी रक्षा करेगा।
'पास्ट परफॉर्मेंस' के जाल से बचें
निवेशकों को अक्सर यह सलाह दी जाती है कि वे पुराने रिटर्न को देखकर निवेश न करें। जो रिटर्न पहले मिल चुके हैं, वे जरूरी नहीं कि भविष्य में भी जारी रहें। पारेख की सलाह है कि बाजार की शोर-शराबे वाली 'थीमैटिक ट्रेंड्स' के पीछे भागने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स, जैसे कि रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और कैश फ्लो पर ध्यान दें।
याद रखें, निवेश में मैच्योरिटी तब आती है जब आप संभावित नुकसान का आकलन करना सीखते हैं। मार्केट में बड़ी गिरावट आना निवेश का ही एक हिस्सा है, जिसे आपको पहले से ही स्वीकार कर लेना चाहिए। बता दें कि DSP Mutual Fund ने हाल ही में 7 अक्टूबर, 2026 को BSE पर DSP BSE Insurance ETF को लिस्ट किया है, जो कंपनी के लगातार बढ़ते पोर्टफोलियो का हिस्सा है।
