Consumption Mutual Funds: GDP तो बढ़ा, पर कंजम्पशन फंड्स ने दिया झटका! **4.9%** का हुआ नुकसान

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AuthorMehul Desai|Published at:
Consumption Mutual Funds: GDP तो बढ़ा, पर कंजम्पशन फंड्स ने दिया झटका! **4.9%** का हुआ नुकसान

भारत की GDP में **7.8%** की दमदार ग्रोथ के बावजूद कंजम्पशन-थीम वाले म्यूचुअल फंड्स सुस्त पड़े हैं। पिछले एक साल में इन फंड्स ने करीब **4.9%** का निगेटिव रिटर्न दिया है, जिसका मुख्य कारण बदलती खरीदारी की आदतें और कमजोर रूरल डिमांड है।

भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है और फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में GDP का आंकड़ा 7.8% तक पहुंच गया है। हालांकि, शेयर बाजार में कंजम्पशन थीम पर आधारित म्यूचुअल फंड्स इस तेजी का फायदा उठाने में नाकाम रहे हैं। औसतन 4.9% का निगेटिव रिटर्न यह बताता है कि ब्रॉड इकोनॉमी की ग्रोथ का फायदा इन फंड्स के पोर्टफोलियो में शामिल कंपनियों को नहीं मिल पा रहा है।

अनलिस्टेड ब्रांड्स की ओर बढ़ा झुकाव

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा चिंता का विषय यह है कि भारतीय उपभोक्ता अब उन छोटे, क्षेत्रीय और ऑर्गेनिक ब्रांड्स की ओर शिफ्ट हो रहे हैं जो शेयर बाजार में लिस्टेड ही नहीं हैं। म्यूचुअल फंड्स के पोर्टफोलियो में आमतौर पर बड़ी और पुरानी कंपनियां होती हैं, जो इस नई डिमांड का लाभ नहीं ले पा रही हैं। जब लोग इन अनलिस्टेड ब्रांड्स पर खर्च करते हैं, तो लिस्टेड कंपनियों की सेल्स पर कोई सकारात्मक असर नहीं पड़ता।

K-शेप्ड डिमांड का असर

बाजार में फिलहाल 'K-शेप्ड' कंजम्पशन ट्रेंड देखने को मिल रहा है। लग्जरी, ट्रैवल और डाइनिंग जैसे प्रीमियम सेगमेंट में तो खर्च जारी है, लेकिन मास-मार्केट और एंट्री-लेवल प्रोडक्ट्स (जो म्यूचुअल फंड्स की मुख्य होल्डिंग हैं) की बिक्री सुस्त है।

महंगाई और रूरल संकट

महंगाई की मार ने आम परिवारों, खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में बजट बिगाड़ दिया है। खाने-पीने और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने FMCG कंपनियों की राह मुश्किल कर दी है। ग्रामीण मांग कमजोर होने से इन कंपनियों के मार्जिन और सेल्स वॉल्यूम दोनों पर दबाव है, जिसका सीधा असर कंजम्पशन फंड्स के परफॉरमेंस पर पड़ रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.