इंडेक्स फंड चुनते समय सिर्फ साइज नहीं, बल्कि सेक्टर कॉन्सेंट्रेशन और रिस्क को समझना जरूरी है। 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, Nifty 50, Next 50 और Nifty 500 तीनों ही 'वेरी हाई' रिस्क कैटेगरी में आते हैं।
इंडेक्स फंड में निवेश करते समय ज्यादातर निवेशक यह गलती करते हैं कि वे सबसे बड़े इंडेक्स को ही सबसे सुरक्षित मान लेते हैं। भारतीय बाजार की वास्तविकता यह है कि चाहे आप Nifty 50 चुनें या Nifty 500, जोखिम का स्तर काफी अधिक बना रहता है। NSE Indices के फरवरी 2026 के मूल्यांकन के अनुसार, Nifty 50, Nifty Next 50 और Nifty 500, तीनों ही इंडेक्स 'Very High' रिस्क की श्रेणी में रखे गए हैं।
Nifty 50 में सेक्टर का दबदबा
Nifty 50 देश की 50 सबसे बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन यह पूरी अर्थव्यवस्था की संतुलित तस्वीर नहीं है। 31 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, इस इंडेक्स में फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर का वेटेज 36.18% था। इसका मतलब है कि अगर बैंकिंग या फाइनेंशियल सेक्टर में दबाव आता है, तो इंडेक्स पर उसका सीधा असर पड़ेगा।
रिस्क स्कोर का सच
NSE Indices के इंटरनल रिस्क स्कोर से पूरी स्थिति साफ हो जाती है:
- Nifty 50: रिस्क स्कोर 5.33
- Nifty Next 50: रिस्क स्कोर 5.43
- Nifty 500: रिस्क स्कोर 5.60
चौंकाने वाली बात यह है कि Nifty 500 में मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों को शामिल करने से इसका रिस्क स्कोर Nifty 50 से भी ज्यादा हो जाता है। यह उन निवेशकों के लिए एक बड़ा सबक है जो यह सोचते हैं कि ज्यादा कंपनियों में पैसा लगाने (डायवर्सिफिकेशन) से पोर्टफोलियो की वोलेटिलिटी कम हो जाएगी।
निवेशक क्या करें?
इंडेक्स को रिस्क के पैमाने पर देखने के बजाय, अपने निवेश के लक्ष्यों के आधार पर चुनें। Nifty 50 में निवेश करना बड़े दिग्गजों पर दांव लगाने जैसा है, जबकि Nifty 500 में निवेश करना पूरी अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी लेना है, लेकिन इसके साथ छोटी कंपनियों की वोलेटिलिटी को भी स्वीकार करना होगा। याद रखें, बाजार की व्यापकता का मतलब हमेशा 'सुरक्षित यात्रा' नहीं होता।
