Carnelian Mutual Fund ने अपने पहले स्मॉल-कैप NFO के जरिए बाजार से **₹632 करोड़** जुटा लिए हैं। पोर्टफोलियो को फुर्तीला बनाए रखने के लिए कंपनी ने लम्प-सम (lump-sum) निवेश पर **₹5,000 करोड़** की सख्त सीमा तय कर दी है।
बाजार का शानदार रिस्पॉन्स
Carnelian Mutual Fund की यह स्मॉल-कैप स्कीम 16 अक्टूबर से 30 अक्टूबर, 2026 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुली थी। कंपनी के लिए सबसे बड़ी बात यह रही कि 45% निवेश भारत के टॉप 30 शहरों के बाहर के निवेशकों से आया है, जो स्मॉल-कैप की बढ़ती लोकप्रियता को दिखाता है। यूनिट अलॉटमेंट का काम 5 नवंबर, 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।
क्यों लगाई गई लिमिट?
स्मॉल-कैप फंड्स में लिक्विडिटी (liquidity) सबसे बड़ी चुनौती होती है। जब फंड का साइज बहुत बड़ा हो जाता है, तो मैनेजर्स के लिए छोटी कंपनियों के शेयर्स को बिना कीमत प्रभावित किए खरीदना-बेचना मुश्किल हो जाता है। इसी दिक्कत को दूर करने के लिए फंड मैनेजर्स दीपक मलिक और विराज पारेख ने इसे ₹5,000 करोड़ तक सीमित रखने का फैसला किया है, ताकि वे छोटे और उभरते लीडर्स पर बेहतर फोकस कर सकें।
रिस्क का रखें ध्यान
निवेशकों को यह समझना होगा कि स्मॉल-कैप फंड्स 'वेरी हाई रिस्क' कैटेगरी में आते हैं। इन कंपनियों का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड सीमित होता है और ये आर्थिक उतार-चढ़ाव के प्रति काफी संवेदनशील होती हैं। नियमों के मुताबिक, इस फंड को अपनी एसेट का 65% से 100% हिस्सा स्मॉल-कैप इक्विटी में ही लगाना होगा, जिससे रिस्क का स्तर काफी ज्यादा बना रहेगा।
आगे क्या होगा?
यह स्कीम 9 नवंबर, 2026 से फिर से निवेश के लिए खुलेगी, जिसमें SIP और लम्प-सम के जरिए पैसा लगाया जा सकेगा। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होनी चाहिए कि जैसे-जैसे फंड का साइज ₹5,000 करोड़ के करीब पहुंचता है, मैनेजमेंट पोर्टफोलियो को कैसे बैलेंस करता है और क्या उनकी स्ट्रैटेजी बाजार के इंडेक्स को मात दे पाती है या नहीं।
