Carnelian Asset Management म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में कदम रख रही है। कंपनी अपना पहला स्मॉल-कैप फंड ला रही है, जिसमें लिक्विडिटी मैनेज करने के लिए ₹5,000 करोड़ का कैप रखा गया है। यह NFO 16 अक्टूबर से निवेश के लिए खुल जाएगा।
Carnelian Asset Management देश की 56वीं सक्रिय एसेट मैनेजमेंट कंपनी के रूप में बाजार में एंट्री कर रही है। कंपनी का पहला दांव स्मॉल-कैप कैटेगरी पर है। इस लॉन्च की सबसे बड़ी खासियत इसका ₹5,000 करोड़ का सब्सक्रिप्शन कैप है। मैनेजमेंट का मानना है कि स्मॉल-कैप स्पेस में फंड का साइज बहुत बड़ा होने पर लिक्विडिटी की समस्या आती है, जिसे दूर रखने के लिए यह सख्त सीमा तय की गई है।\n\n### स्मॉल-कैप में 'कैपिंग' क्यों जरूरी है?\n\nस्मॉल-कैप कंपनियों में रोजाना होने वाली ट्रेडिंग वॉल्यूम काफी कम होती है। जब कोई म्यूचुअल फंड बहुत बड़ी राशि को इस कैटेगरी में मैनेज करता है, तो बड़े पैमाने पर शेयर खरीदना या बेचना मुश्किल हो जाता है, जिससे स्टॉक की कीमतों पर असर पड़ता है। Carnelian का लक्ष्य 30 से 50 चुनिंदा कंपनियों का पोर्टफोलियो रखना है, जिससे वे बाजार में आसानी से एंट्री और एग्जिट कर सकें।\n\n### निवेश की रणनीति और जोखिम\n\nइस फंड की कमान कंपनी के फाउंडर विकास खेमानी (Vikas Khemani) के हाथों में है, जिनकी रणनीति फंडामेंटल रिसर्च और वैल्यूएशन पर आधारित है। टीम 1,000 से अधिक स्मॉल-कैप शेयरों में से बेहतरीन विकल्प चुनकर एक फोकस्ड पोर्टफोलियो बनाने की योजना बना रही है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि स्मॉल-कैप फंड्स में भारी उतार-चढ़ाव रहता है। इसके अलावा, यह फंड हाउस का पहला रिटेल प्रोडक्ट है, इसलिए निवेशकों के पास कंपनी की पुरानी परफॉर्मेंस का कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है।\n\n### निवेशकों के लिए सलाह\n\nमौजूदा समय में भारतीय स्मॉल-कैप बाजार में काफी तेजी है और वैल्युएशन भी ऊंचे स्तर पर हैं, ऐसे में सही शेयरों का चुनाव ही सफलता की कुंजी है। निवेशकों को यह देखना होगा कि फंड हाउस अपनी तय सीमा के भीतर कैसे पोर्टफोलियो बनाता है और बाजार के उतार-चढ़ाव को कैसे संभालता है।
