Capitalmind ने ₹500 करोड़ AUM का बड़ा मुकाम हासिल किया
भारत के एसेट मैनेजमेंट सेक्टर में Capitalmind ने तेजी से अपनी एक खास पहचान बनाई है। अपने पहले ही फाइनेंशियल ईयर में कंपनी ने ₹500 करोड़ एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का आंकड़ा पार कर लिया है। यह एक बड़ी कामयाबी है, खासकर ऐसे चुनौतीपूर्ण मार्केट में जहाँ विदेशी निवेशकों का पैसा निकल रहा है और करेंसी पर दबाव है। कंपनी ने 1,300 से अधिक शहरों में 11,000 से ज्यादा इन्वेस्टर्स का विश्वास जीता है।
'डेटा ही सब कुछ है': भावनाओं से परे निवेश
CEO दीपक शेनॉय एक अनुशासित और तथ्यों पर आधारित निवेश की वकालत करते हैं। उनका कहना है कि "जिन स्टॉक्स को हम खरीदते हैं, वे हमसे प्यार नहीं करते।" इसी सोच के साथ Capitalmind क्वांटिटेटिव, डेटा-आधारित फैसलों पर जोर देता है, जहाँ भावनाओं या व्यक्तिगत विचारों को कोई जगह नहीं दी जाती। फर्म क्वालिटी, वैल्यू, मोमेंटम, ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी जैसे मापदंडों पर स्टॉक्स को रैंक करती है और इन सबको मिलाकर डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाती है।
'रेजीम इंडिकेटर' से मार्केट की चाल पर नज़र
बदलते मार्केट हालातों के साथ तालमेल बिठाने के लिए, Capitalmind एक "रेजीम इंडिकेटर" का इस्तेमाल करता है। इससे यह तय होता है कि मार्केट ऊपर जा रहा है, नीचे आ रहा है या साइडवेज चल रहा है, और उसी के अनुसार निवेश की रणनीति में बदलाव किया जाता है। यह सिस्टमैटिक, प्रोबेबिलिटी-आधारित (संभावना-आधारित) तरीका पोर्टफोलियो को हर तरह के मार्केट साइकल में सही स्थिति में रखने में मदद करता है। यह रणनीति करीब दो दशक के बैक-टेस्टेड डेटा पर आधारित है।
इंसानी पक्षपात से पोर्टफोलियो को कैसे बचाते हैं?
Capitalmind मानता है कि इंसानों द्वारा डिजाइन किए गए मॉडलों में पक्षपात (bias) आ सकता है। इसलिए, फर्म कई सुरक्षा उपाय अपनाती है। इसमें ग्लोबल रिसर्च पर आधारित मॉडल बनाना, उन्हें इंडियन मार्केट के लिए परखना और डेटा के प्रति ओवरफिटिंग से बचना शामिल है। मॉडल के आउटपुट का सख्ती से पालन किया जाता है - जैसे, अगर मॉडल स्टॉक बेचने का संकेत दे, तो व्यक्तिगत राय के बावजूद उसे बेचा जाता है। फर्म अपने पोर्टफोलियो को मार्केट इंडेक्स से काफी अलग रखती है।
आगे का मार्केट कैसा रहेगा और इन्वेस्टर्स के लिए सलाह
CEO दीपक शेनॉय शॉर्ट-टर्म मार्केट की अनिश्चितताओं को लेकर सतर्क हैं। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) और सप्लाई चेन में दिक्कतें (supply disruptions) चिंता का विषय हैं। हालांकि, वे अगले दशक में भारत की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ प्रोस्पेक्ट्स को लेकर आशावादी हैं। उनका मुख्य मंत्र इन्वेस्टर्स के लिए है: अपने निवेश को अपने टाइम होराइजन से जोड़ें, अनुशासन बनाए रखें, मार्केट को टाइम करने की कोशिश न करें और धैर्य रखें। कंसिस्टेंसी और धैर्य ही लॉन्ग-टर्म सफलता की कुंजी है।