STT Hike का असर: F&O ट्रेडिंग हुई महंगी, बढ़ी लागत
Union Budget 2026 के बाद, 1 अप्रैल 2026 से Futures & Options (F&O) सेगमेंट में Securities Transaction Tax (STT) में की गई बढ़ोतरी ने एक्टिव ट्रेडर्स के लिए लागत बढ़ा दी है। अब फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर STT 0.02% से बढ़कर 0.05% हो गया है, और ऑप्शंस प्रीमियम पर यह 0.10% से बढ़कर 0.15% कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी, भले ही प्रति ट्रांजैक्शन छोटी लगे, लेकिन हाई-फ्रीक्वेंसी और स्पेकुलेटिव (speculative) स्ट्रैटेजी अपनाने वाले ट्रेडर्स के लिए भारी पड़ रही है। ऐसे में, ज्यादा लीवरेज्ड (leveraged) और हाई-टर्नओवर (high-churn) वाले डेरिवेटिव्स से हटकर, ज्यादा डायवर्सिफाइड (diversified) और कम वोलेटाइल (volatile) निवेश साधनों की ओर रुख किया जा रहा है।
Multi-Asset Funds की बहार, Gold की अस्थिरता बनी चिंता
इसी माहौल में, Multi-Asset Allocation Funds ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। ये फंड्स शेयर बाज़ार, डेट और Gold व Silver जैसी कमोडिटी में निवेश करते हैं। दिसंबर 2025 में इन फंड्स में करीब ₹7,426 करोड़ का नेट इनफ्लो (net inflow) देखा गया, जिससे इनका कुल AUM (Assets Under Management) ₹1.65 लाख करोड़ तक पहुंच गया। इस कैटेगरी का प्रदर्शन शानदार रहा है, पिछले 1 साल में औसतन 19.42% और 3 साल का CAGR (Compound Annual Growth Rate) 18.55% रहा है। इस परफॉर्मेंस का मुख्य कारण 2025 में Gold की शानदार रैली रही, जिसने कई रिकॉर्ड तोड़े और 60% से ज्यादा का रिटर्न दिया। हालांकि, Gold की कहानी अब बदल रही है। फरवरी 2026 की शुरुआत में, कीमती धातु में भारी बिकवाली (sell-off) देखी गई, जिससे इसके मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) में भारी गिरावट आई। Gold जैसी महत्वपूर्ण एसेट क्लास की यह अस्थिरता, Multi-Asset Funds के हालिया बेहतरीन प्रदर्शन की स्थिरता पर सवाल खड़े करती है और निवेशकों के लिए जोखिम का एक नया पहलू जोड़ती है।
Aggressive Hybrid Funds: लॉन्ग-टर्म निवेश का भरोसेमंद विकल्प
जब Multi-Asset Funds अपनी हालिया कमाई के कारण सुर्खियां बटोर रहे हैं, Aggressive Hybrid Funds निवेशकों को लॉन्ग-टर्म (long-term) में एक आकर्षक निवेश का मौका दे रहे हैं। इन फंड्स में 65-80% शेयर बाज़ार में और बाकी डेट में निवेश किया जाता है। इनका मकसद ग्रोथ के साथ-साथ कैपिटल प्रोटेक्शन (capital protection) भी देना है। ऐतिहासिक तौर पर, Aggressive Hybrid Funds ने Nifty 50 जैसे सिर्फ शेयर बाज़ार वाले इंडेक्स की तुलना में बेहतर रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न्स (risk-adjusted returns) दिए हैं। कैटेगरी का औसत शार्प रेश्यो (Sharpe Ratio) लगभग 1.50 और स्टैंडर्ड डेविएशन (standard deviation) करीब 9.99% रहा है, जबकि Nifty 50 की वोलेटिलिटी इससे कहीं ज्यादा है। भले ही इनका 1- साल का औसत रिटर्न 7.28% रहा हो, लेकिन 3-साल का CAGR 14.79% और 5-साल का CAGR 12.89% दिखाता है कि ये धैर्य रखने वाले निवेशकों के लिए वेल्थ (wealth) जेनरेट करने में सक्षम हैं। साथ ही, ये फंड्स टैक्स एफिशिएंट (tax efficient) भी हैं क्योंकि इक्विटी और डेट के बीच रीबैलेंसिंग (rebalancing) पर आमतौर पर कैपिटल गेन्स टैक्स (capital gains tax) नहीं लगता। दिसंबर 2025 में, Aggressive Hybrid Funds में ₹1,514 करोड़ का नेट इनफ्लो हुआ, जो निवेशकों की निरंतर, हालांकि थोड़ी सतर्क, रुचि को दर्शाता है।
रणनीति का चुनाव: जोखिम और लक्ष्य पर निर्भर
2026 में Multi-Asset और Aggressive Hybrid Funds के बीच चुनाव, निवेशक के रिस्क टॉलरेंस (risk tolerance) और लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों पर निर्भर करता है। Multi-Asset Funds इक्विटी में गिरावट के दौरान पोर्टफोलियो को सहारा दे सकते हैं, लेकिन उनका प्रदर्शन कमोडिटी की कीमतों से जुड़ा हुआ है। Aggressive Hybrid Funds, इसके विपरीत, शेयर बाज़ार की ग्रोथ क्षमता का सीधा एक्सपोजर देते हैं, जो डेट के साथ मिलकर प्योर शेयर बाज़ार की तुलना में कम वोलेटिलिटी प्रदान करता है। F&O पर STT में हुई बड़ी बढ़ोतरी, उन स्ट्रैटेजीज को और महंगा बनाती है जो हाई-वॉल्यूम डेरिवेटिव्स पर निर्भर करती हैं। यह रेगुलेटरी बदलाव, शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के बजाय फंडामेंटल ग्रोथ (fundamental growth) और कैपिटल एप्रिसिएशन (capital appreciation) पर केंद्रित निवेश पद्धतियों के पक्ष में है। इस तरह, अच्छी तरह से मैनेज किए गए Aggressive Hybrid Funds, उन निवेशकों के लिए और भी आकर्षक हो जाते हैं जो लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन में रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न को प्राथमिकता देते हैं।