भारतीय निवेशकों के लिए विदेशी म्यूचुअल फंड में SIP शुरू करने का विकल्प अब लगभग खत्म हो गया है। **15 जुलाई, 2026** तक, केवल Baroda BNP Paribas Aqua Fund ही नए SIP रजिस्ट्रेशन स्वीकार कर रहा है। RBI और SEBI के तय विदेशी निवेश की सीमा पार होने के कारण बाकी फंड हाउस ने नए पैसे लेना बंद कर दिया है।
विदेशी निवेश का रास्ता हुआ बंद?
अगर आप भारतीय म्यूचुअल फंड के जरिए विदेश में निवेश (International Investment) करना चाहते हैं, तो आपके विकल्प अब बेहद सीमित हो गए हैं। 15 जुलाई, 2026 तक की स्थिति के अनुसार, केवल Baroda BNP Paribas Aqua Fund of Fund ही एकमात्र ऐसा फंड है जो नए सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) रजिस्ट्रेशन और एकमुश्त निवेश (Lump-sum Investment) स्वीकार कर रहा है। PGIM India Mutual Fund, Franklin Templeton Mutual Fund, और Edelweiss Mutual Fund जैसे बड़े फंड हाउस अपने इंटरनेशनल फंड्स में नए निवेश को पहले ही रोक चुके हैं।
क्यों लगी रोक? रेगुलेटरी लिमिट का चक्कर
इस तरह फंड्स के बंद होने का मुख्य कारण रेगुलेटरी लिमिट (Regulatory Limit) है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने भारतीय म्यूचुअल फंड्स के लिए विदेशी निवेश की कुल सीमा $7 बिलियन तय की है। इसके अलावा, हर फंड हाउस की अपनी अलग सीमाएं हैं जिनका उन्हें पालन करना होता है। जब कोई फंड हाउस विदेशी स्टॉक या ETF में अपनी आवंटित सीमा तक पहुंच जाता है, तो उसे इन नियमों का पालन करने के लिए नया पैसा लेना बंद करना पड़ता है। कई एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) ने अपनी यह सीमा पूरी कर ली है, जिसके चलते यह रोक लगाई गई है।
निवेशकों के लिए मतलब?
निवेशकों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि म्यूचुअल फंड के जरिए पोर्टफोलियो को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डाइवर्सिफाई (Diversify) करने की क्षमता फिलहाल बाधित हो गई है। हालांकि, यह रोक केवल नए निवेश पर लागू होती है; मौजूदा निवेश पर आमतौर पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। जिन निवेशकों के पास पहले से इन फंड्स में सक्रिय SIP चल रही है, वे आमतौर पर अपना निवेश जारी रख सकते हैं, जब तक कि फंड हाउस ने विशेष रूप से इसे रोकने का फैसला न किया हो। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने विशिष्ट फंड्स की नवीनतम स्थिति के लिए फंड हाउस की आधिकारिक वेबसाइट या अपने इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म पर जांच करें।
आगे क्या?
यह प्रतिबंध तब तक बने रहने की उम्मीद है जब तक कोई एक चीज नहीं होती: या तो रेगुलेटर (Regulator) कुल इंडस्ट्री इन्वेस्टमेंट लिमिट को बढ़ाता है, या अन्य निवेशकों द्वारा रिडेम्पशन (Redemption) के कारण मौजूदा फंड्स में जगह खाली होती है। तब तक, म्यूचुअल फंड के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर (International Exposure) चाहने वाले नए निवेशकों के पास सीमित विकल्प होंगे। निवेशकों को SIP रजिस्ट्रेशन नीतियों में किसी भी बदलाव या विदेशी निवेश की सीमा में संभावित परिवर्तनों के बारे में SEBI की घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए।
