Bank of India Hybrid Fund: 1 साल में **14.9%** का शानदार रिटर्न, पर रिस्क भी है भरपूर!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Bank of India Hybrid Fund: 1 साल में **14.9%** का शानदार रिटर्न, पर रिस्क भी है भरपूर!

बैंक ऑफ इंडिया मिड एंड स्मॉल कैप इक्विटी एंड डेट फंड (Bank of India Mid & Small Cap Equity & Debt Fund) ने पिछले एक साल में **14.9%** का दमदार रिटर्न दिया है। इसने कई प्रतिस्पर्धियों और अपने बेंचमार्क को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, यह फंड स्मॉल-कैप कंपनियों पर ज्यादा फोकस करने के कारण हाई-रिस्क प्रोफाइल वाला है, जो बाजार में गिरावट के समय बड़ी उथल-पुथल मचा सकता है।

एक साल में 14.9% का तगड़ा रिटर्न!

बैंक ऑफ इंडिया मिड एंड स्मॉल कैप इक्विटी एंड डेट फंड (Bank of India Mid & Small Cap Equity & Debt Fund) ने पिछले एक साल में 14.9% का शानदार रिटर्न दर्ज किया है। इस प्रदर्शन के साथ, यह फंड एग्रेसिव हाइब्रिड फंड कैटेगरी में टॉप परफॉर्मर्स में से एक बन गया है। यह फंड अपनी मार्केट कंडीशन को संभालने की क्षमता दिखाता है, जिससे यह अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, फंड ने एक साल की अवधि में अपने बेंचमार्क को लगभग 9.1% अंकों से पीछे छोड़ दिया है, और यही ट्रेंड तीन साल की अवधि में भी बना हुआ है।

इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी और रिस्क प्रोफाइल

निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि इस फंड के हालिया लाभों का मूल्यांकन करने से पहले इसके स्वभाव को जानना महत्वपूर्ण है। एक एग्रेसिव हाइब्रिड स्कीम होने के नाते, यह फंड अपनी संपत्ति का 65% से 80% हिस्सा मिड और स्मॉल-कैप शेयरों में निवेश करता है, और बाकी हिस्सा डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाता है। यह खास स्ट्रैटेजी छोटी, बढ़ती कंपनियों की ग्रोथ क्षमता का फायदा उठाने के लिए बनाई गई है। लेकिन, इस स्ट्रक्चर के कारण इसका रिस्क रेटिंग 'वेरी हाई' (Very High) है। मिड और स्मॉल-कैप कंपनियों पर ज्यादा फोकस करने वाले फंड, लार्ज-कैप या प्योर डेट फंड्स की तुलना में मार्केट में गिरावट के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। जब व्यापक बाजार दबाव में आता है या मंदी छा जाती है, तो ऐसे फंड अक्सर कीमतों में तेज गिरावट का अनुभव करते हैं, जो निवेशकों के धैर्य की परीक्षा ले सकते हैं।

परफॉरमेंस और मैनेजर का नजरिया

फरवरी 2017 से फंड मैनेजर आलोक सिंह (Alok Singh) के नेतृत्व में, फंड ने ग्रोथ को बढ़ाने के लिए छोटी कंपनियों पर दांव लगाने की अपनी रणनीति को लगातार बनाए रखा है। हालिया प्रदर्शन इसी अप्रोच को दर्शाता है, जिससे पिछले 12 महीनों में यह एग्रेसिव हाइब्रिड सेगमेंट में अपने कुछ प्रतिस्पर्धियों से आगे रहा है। हालांकि, फंड के इतिहास से पता चलता है कि अलग-अलग टाइम होराइजन्स में प्रदर्शन अलग-अलग हो सकता है, जो इक्विटी-लिंक्ड स्कीम्स के लिए आम है।

निवेशकों को क्या ध्यान देना चाहिए?

इस फंड को देखने वाले निवेशकों को केवल 14.9% रिटर्न पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय अपनी जोखिम लेने की क्षमता पर विचार करना चाहिए। चूंकि पोर्टफोलियो मिड और स्मॉल-कैप शेयरों पर आधारित है, इसलिए अस्थिरता (volatility) इसमें अंतर्निहित है। यह फंड आम तौर पर उन लोगों के लिए उपयुक्त माना जाता है जिनका निवेश का नजरिया लंबा होता है, आमतौर पर तीन साल या उससे अधिक, ताकि अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव को झेल सकें। शेयरधारकों के लिए मुख्य निगरानी यह बनी हुई है कि फंड बाजार में गिरावट के दौरान नुकसान को कैसे मैनेज करता है, क्योंकि वही स्ट्रैटेजी जो बढ़ते बाजार में रिटर्न बढ़ाती है,sentiment नकारात्मक होने पर अधिक नुकसान का कारण बन सकती है। सभी म्यूचुअल फंड निवेशों की तरह, फंड के पोर्टफोलियो आवंटन और बदलते बाजार चक्रों को संभालने की मैनेजर की क्षमता की समीक्षा करना, अल्पकालिक प्रदर्शन संख्याओं को ट्रैक करने से अधिक महत्वपूर्ण है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.