Bank of India Hybrid Fund का दमदार प्रदर्शन! 3 साल में **18.2%** रिटर्न, जानिए टॉप फंड्स की लिस्ट

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AuthorNeha Patil|Published at:
Bank of India Hybrid Fund का दमदार प्रदर्शन! 3 साल में **18.2%** रिटर्न, जानिए टॉप फंड्स की लिस्ट

Bank of India Mid & Small Cap Equity & Debt Fund ने पिछले 3 सालों में **18.2%** का शानदार CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) हासिल कर एग्रेसिव हाइब्रिड फंड कैटेगरी में टॉप पोजिशन हासिल की है। यह फंड ICICI Prudential और Quant जैसे बड़े फंड्स से भी आगे निकल गया है।

Detailed Coverage

Bank of India फंड का जलवा

एग्रेसिव हाइब्रिड फंड्स की दुनिया में Bank of India Mid & Small Cap Equity & Debt Fund ने तहलका मचा दिया है। 21 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस फंड ने पिछले तीन सालों में 18.2% का शानदार कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया है। इस प्रदर्शन के दम पर इसने अपनी कैटेगरी के दूसरे बड़े फंड्स जैसे ICICI Prudential Equity & Debt Fund (जिसका रिटर्न 15.1% रहा) और Quant Aggressive Hybrid Fund (जिसका रिटर्न 14.2% रहा) को पीछे छोड़ दिया है।

फंड का साइज़ और बेंचमार्क से तुलना

जब हम फंड्स के साइज की बात करते हैं, तो SBI Equity Hybrid Fund ₹85,633.5 करोड़ के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) के साथ इस कैटेगरी में सबसे बड़ा फंड बना हुआ है। वहीं, Bank of India फंड की परफॉर्मेंस को अगर इसके बेंचमार्क से देखें, तो यह तीन साल की अवधि में 0.9% पीछे रहा, क्योंकि बेंचमार्क का रिटर्न 19.1% था। हालांकि, एक साल की अवधि में इसने अपने बेंचमार्क को 3.8% के अंतर से पीछे छोड़ा, जबकि बेंचमार्क ने 4.4% का रिटर्न दिया था।

छोटे समय के लिए कौन आगे?

म्यूचुअल फंड की दुनिया में परफॉर्मेंस अक्सर निवेश की अवधि पर निर्भर करती है। जहां Bank of India फंड तीन साल के लिए आगे है, वहीं हालिया प्रदर्शन में Quant Aggressive Hybrid Fund का दबदबा रहा है। Quant फंड ने पिछले एक महीने में 2.1% और पिछले तीन महीनों में 8.6% का रिटर्न दिया है। एक साल की अवधि में भी इसने 12.8% का रिटर्न कमाया है, जो दिखाता है कि बाजार के हालात कैसे रैंकिंग बदल सकते हैं।

एग्रेसिव हाइब्रिड फंड्स का मुख्य उद्देश्य इक्विटी (शेयरों) से ग्रोथ और डेट (बॉन्ड) से स्थिरता का संतुलन बनाना होता है। इनमें आमतौर पर शेयरों का आवंटन ज्यादा होता है। ऐसे में, फंड मैनेजर की क्षमता कि वह इक्विटी मार्केट के साइकल को कितनी अच्छी तरह भुनाता है, निवेशकों के रिटर्न पर सीधा असर डालती है। इसलिए, किसी भी फंड की लंबी अवधि की क्षमता का आकलन करने के लिए सिर्फ एक समय-सीमा पर निर्भर रहने के बजाय, एक, तीन और पांच साल जैसे अलग-अलग अवधियों में उसके प्रदर्शन की निरंतरता को देखना बेहतर होता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.