Bandhan vs ICICI Pru: बैंकिंग डेट फंड में किसका जलवा? 1 साल में Bandhan आगे, 3 साल में ICICI Pru

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AuthorNeha Patil|Published at:
Bandhan vs ICICI Pru: बैंकिंग डेट फंड में किसका जलवा? 1 साल में Bandhan आगे, 3 साल में ICICI Pru

बैंकिंग और पीएसयू डेट फंड्स के प्रदर्शन में समय के साथ बड़ा बदलाव आया है। जहाँ एक साल के लिए Bandhan Banking and PSU Fund **5.8%** रिटर्न के साथ टॉप पर है, वहीं तीन साल की अवधि में ICICI Prudential Banking & PSU Debt Fund **7.2%** रिटर्न के साथ सबसे आगे है। यह दिखाता है कि फंड चुनते समय सिर्फ हालिया प्रदर्शन नहीं, बल्कि लंबी अवधि के रिटर्न पर भी गौर करना चाहिए।

Banking & PSU Debt Funds: प्रदर्शन में बड़ा फेरबदल!

हालिया प्रदर्शन के आंकड़े बताते हैं कि Banking and PSU Debt Mutual Funds के लीडरशिप में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जो कि चुने गए समय के पैमाने पर निर्भर करता है। अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, Bandhan Banking and PSU Fund ने एक साल के रिटर्न में बाजी मारी है, जबकि ICICI Prudential Banking & PSU Debt Fund तीन साल की लंबी अवधि में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

एक साल का प्रदर्शन:

निवेशकों के लिए जो पिछले एक साल पर नजर डाल रहे हैं, Bandhan का फंड 5.8% का रिटर्न देने में कामयाब रहा। इसने ICICI Prudential और Kotak Banking and PSU Debt Fund को मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया, जिन्होंने क्रमशः 5.8% और 5.6% का रिटर्न दिया।

तीन साल का लेखा-जोखा:

लेकिन जब समय सीमा को तीन साल तक बढ़ाया जाता है, तो नतीजे बदल जाते हैं। ICICI Prudential Banking & PSU Debt Fund ने 7.2% का शानदार रिटर्न हासिल किया है, जो लंबी अवधि में अपने प्रदर्शन को बनाए रखने की क्षमता को दर्शाता है।

Banking & PSU Debt Funds क्या होते हैं?

ये फंड अपेक्षाकृत सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स माने जाते हैं। इनमें मुख्य रूप से पब्लिक सेक्टर बैंकों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी कंपनियों द्वारा जारी किए गए बॉन्ड और डेट में निवेश किया जाता है। इन फंडों को लिक्विड फंड और लॉन्ग-टर्म कॉर्पोरेट बॉन्ड फंड के बीच का रास्ता माना जाता है, जो सुरक्षा के साथ-साथ संभावित यील्ड का संतुलन प्रदान करते हैं।

जोखिम और ध्यान देने योग्य बातें:

अपनी रक्षात्मक प्रकृति के बावजूद, ये फंड भी बाजार के उतार-चढ़ाव से अछूते नहीं हैं। इनकी कीमतें ब्याज दरों के विपरीत दिशा में चलती हैं। अगर अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो पोर्टफोलियो में मौजूद मौजूदा बॉन्ड का मूल्य गिर सकता है। साथ ही, पब्लिक सेक्टर यूनिट्स जैसे जारीकर्ताओं की क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होती है, फिर भी यदि किसी विशेष जारीकर्ता के वित्तीय स्वास्थ्य में बदलाव आता है तो फंड क्रेडिट जोखिम का सामना कर सकते हैं। निवेशकों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि फंड मैनेजमेंट के फैसलों या शुल्कों के कारण फंड का प्रदर्शन उसके बेंचमार्क इंडेक्स से थोड़ा अलग हो सकता है।

निवेशक कैसे करें चुनाव?

इन फंडों का मूल्यांकन करते समय, निवेशकों को हालिया रिटर्न से आगे देखना चाहिए। महत्वपूर्ण मेट्रिक्स में पोर्टफोलियो की औसत मैच्योरिटी (जो ब्याज दर परिवर्तनों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती है) और एक्सपेंस रेशियो (जो सीधे निवेशक के रिटर्न को प्रभावित करता है) शामिल हैं। अनुभवी निवेशक अक्सर केवल हालिया उच्च रिटर्न का पीछा करने के बजाय, कई बाजार चक्रों में लगातार रिटर्न पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.