Bandhan Ultra Short Duration Fund: 3 महीने में सबसे ज़्यादा रिटर्न! पर लंबी अवधि में क्या है बाज़ी? जानें

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AuthorAditya Rao|Published at:
Bandhan Ultra Short Duration Fund: 3 महीने में सबसे ज़्यादा रिटर्न! पर लंबी अवधि में क्या है बाज़ी? जानें

Bandhan Ultra Short Duration Fund ने पिछले 3 महीनों में **1.8%** का ज़बरदस्त रिटर्न देकर अपने कई साथियों को पीछे छोड़ दिया है। लेकिन, क्या यह लीडरशिप लंबे समय तक कायम रहेगी? लंबी अवधि के डेटा पर नज़र डालने पर तस्वीर कुछ और ही दिखती है।

3 महीने में Bandhan Ultra Short Duration Fund का कमाल

हालिया तीन महीनों में Bandhan Ultra Short Duration Fund ने 1.8% का रिटर्न दर्ज किया है, जो इसे अपनी कैटेगरी में सबसे आगे रखता है। यह आंकड़े 7 जुलाई, 2026 तक के हैं और ऐसे फंड्स पर आधारित हैं जिनका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) कम से कम ₹1,500 करोड़ है।

हालांकि, यह फंड शॉर्ट-टर्म में भले ही अव्वल रहा हो, लेकिन अलग-अलग टाइमफ्रेम पर टॉप परफॉर्मिंग फंड्स की लिस्ट बदल जाती है।

लंबी अवधि में कौन है बेहतर?

अगर हम तीन महीने से आगे देखें, तो दूसरे फंड्स बाज़ी मार रहे हैं। उदाहरण के लिए:

  • 6 महीने में HSBC Ultra Short Duration Fund ने 3.3% का रिटर्न देकर बाज़ी मारी है।
  • 1 साल की अवधि में Aditya Birla SL Savings Fund 6.3% रिटर्न के साथ सबसे आगे है।
  • 3 साल में भी Aditya Birla SL Savings Fund का दबदबा कायम है, जिसने 7.3% का रिटर्न दिया है।

फंड्स और उनके बेंचमार्क

सिर्फ साथियों से तुलना ही काफी नहीं है। Bandhan Ultra Short Duration Fund ने अपने बेंचमार्क इंडेक्स को भी पीछे छोड़ा है। एक साल में, फंड ने अपने बेंचमार्क के 4.3% रिटर्न की तुलना में 1.9% ज़्यादा, यानी 6.2% का रिटर्न दिया। तीन साल की अवधि में भी फंड ने बेंचमार्क के 4.3% के मुकाबले 0.6% ज़्यादा, यानी 4.9% का रिटर्न हासिल किया।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

यह दिखाता है कि शॉर्ट-टर्म में किसी फंड का टॉप पर होना, उसके लॉन्ग-टर्म में भी वैसा ही प्रदर्शन करने की गारंटी नहीं है। अल्ट्रा-शॉर्ट-ड्यूरेशन फंड्स कम मैच्योरिटी वाले डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं ताकि लिक्विडिटी और रिटर्न में बैलेंस बना रहे। ये फंड इंटरेस्ट रेट्स और क्रेडिट क्वालिटी में होने वाले बदलावों के प्रति संवेदनशील होते हैं।

इसलिए, निवेशकों को सिर्फ मौजूदा टॉप रैंकिंग पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि लगातार कई मार्केट साइकल्स में फंड के प्रदर्शन, एक्सपेंस रेशियो और अंडरलाइंग बॉन्ड्स की क्रेडिट क्वालिटी पर भी गौर करना चाहिए। एक जैसे इन्वेस्टमेंट मैंडेट वाले दूसरे फंड्स के मुकाबले तुलना करना भी ज़रूरी है, क्योंकि अलग-अलग स्ट्रेटेजीज़ के कारण समय के साथ अलग-अलग नतीजे मिल सकते हैं।

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