### फंड की परफॉरमेंस और स्ट्रैटेजी
यह फंड अपने दो साल के सफर में निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है। पिछले एक साल में, इस स्कीम ने 20.96% का रिटर्न दिया है, जबकि इसके एसआईपी (SIP) पर 25.4% का रिटर्न मिला है, जो 22.5% के बेंचमार्क रिटर्न से काफी बेहतर है। इस दमदार परफॉरमेंस का राज फंड की डायवर्सिफाइड एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजी है। फंड अपने 50% एसेट्स को डोमेस्टिक शेयरों में, 15% को गोल्ड और सिल्वर जैसी कीमती धातुओं में, 15% को आर्बिट्राज में, 10% को इंटरनेशनल शेयरों में और बाकी 10% को फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करता है। इस स्ट्रैक्चर का मकसद अलग-अलग एसेट क्लास की खूबियों को मिलाकर जोखिम-समायोजित रिटर्न (risk-adjusted returns) को बढ़ाना है।
### मार्केट का सपोर्ट और निवेशकों का भरोसा
निवेशकों का हाइब्रिड और मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स की ओर बढ़ा रुझान अप्रैल 2023 में डेट फंड टैक्सेशन (debt fund taxation) में हुए बदलावों से भी प्रेरित हुआ है, जिसने लंबी अवधि के निवेश पर इंडेक्सेशन लाभ को कम कर दिया। ऐसे में, ग्रोथ और स्टेबिलिटी का बैलेंस देने वाले डायवर्सिफाइड प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ी है। हाइब्रिड फंड्स शेयरों की ग्रोथ क्षमता को डेट की स्टेबिलिटी के साथ जोड़ते हैं, जो मॉडरेट रिस्क लेने वाले निवेशकों के लिए मुफीद है।
फंड के गोल्ड और सिल्वर में निवेश ने भी अच्छा साथ दिया है। 2024 में गोल्ड की कीमतों में 26% का उछाल आया, जबकि सिल्वर 42% तक बढ़ा, जिसका कारण सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और जियोपॉलिटिकल टेंशन रही। एनालिस्ट्स गोल्ड की कीमत दिसंबर 2025 तक ₹1.34 लाख और 2026 तक ₹1.54 लाख तक पहुंचने का अनुमान लगा रहे हैं। भारतीय शेयर मार्केट ने भी 2024 में करीब 9% का रिटर्न दिया, जिसमें BSE Sensex फरवरी 2026 की शुरुआत तक 84,000 के पार पहुंच गया था। 10-साल के इंडियन गवर्नमेंट सिक्योरिटीज यील्ड लगभग 6.76% के आसपास थे।
### एनालिस्ट्स की राय और संभावित रिस्क
हालांकि, फंड मैनेजर और एनालिस्ट्स कुछ बातों पर गौर करने की सलाह देते हैं। मल्टी-एसेट फंड्स के लिए एक आम चिंता यह है कि जब शेयर मार्केट में बहुत तेज तेजी आती है, तो वे अपनी कम शेयर एलोकेशन के कारण अंडरपरफॉर्म कर सकते हैं। इसके अलावा, कुछ फिक्स्ड इनकम एसेट्स (जैसे हाई-यील्ड या इमर्जिंग मार्केट डेट) बाजार में तनाव के दौरान शेयरों के साथ कोरिलेट (correlate) कर सकते हैं, जिससे डायवर्सिफिकेशन के फायदे कम हो सकते हैं। फंड का परफॉरमेंस इस बात पर निर्भर करेगा कि शेयर, गोल्ड और बॉन्ड जैसी अलग-अलग एसेट क्लासेस कितनी अच्छी तरह काम करती हैं।
इसका टैक्स-एफिशिएंट शेयर फंड स्टेटस भी बनाए गए शेयर एलोकेशन परसेंटेज पर निर्भर करता है, जो मार्केट की डायनामिक्स या फंड मैनेजमेंट की स्ट्रैटेजी के हिसाब से बदल सकता है।
### आगे क्या?
जैसे-जैसे यह फंड अपने तीसरे साल में प्रवेश कर रहा है, इसका परफॉरमेंस शेयर मार्केट के सेंटिमेंट, कमोडिटी की कीमतों, इंटरेस्ट रेट और ग्लोबल इकोनॉमिक शिफ्ट्स से प्रभावित होता रहेगा। हाइब्रिड प्रोडक्ट्स की डिमांड मजबूत बनी हुई है, लेकिन निवेशकों को इस बात पर बारीकी से नजर रखनी होगी कि क्या फंड डायवर्सिफिकेशन के फायदों के साथ-साथ प्रतिस्पर्धी रिटर्न दे पाता है, खासकर जब शेयर मार्केट बहुत मजबूत हो।