Bandhan Infrastructure Fund ने 15 साल का सफर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह फंड भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की ग्रोथ स्टोरी का फायदा उठाने में कामयाब रहा है। फंड के पास अभी करीब ₹1,469 करोड़ की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) है, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। यह सफलता खासकर सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोरदार पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) का नतीजा है।
इस शानदार परफॉर्मेंस के पीछे की मुख्य वजहें हैं भारत सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोरदार निवेश। उदाहरण के लिए, 2026-27 के यूनियन बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करीब ₹11.21 लाख करोड़ आवंटित किए गए थे, जो लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्ट्रेटेजी को मजबूत करते हैं। फंड के पोर्टफोलियो में Larsen & Toubro, Reliance Industries और Bharti Airtel जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जो इन अनुकूल आर्थिक माहौल का लाभ उठा रहे हैं। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर 2025 से 2033 के बीच सालाना करीब 9.57% की दर से बढ़ेगा।
हालांकि Bandhan Infrastructure Fund ने लंबे समय में ज़बरदस्त रिटर्न दिया है, लेकिन इसकी तुलना दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स से करना ज़रूरी है। कुछ कॉम्पिटिटर फंड्स ने 5 साल में 29% से ज़्यादा का CAGR दिया है। वहीं, Bandhan का एक्सपेंस रेश्यो, खासकर रेगुलर प्लान के लिए, करीब 2.14% है, जो Franklin Build India Fund (0.99%) या LIC MF Infrastructure Fund (0.98%) जैसे फंड्स से काफी ज़्यादा है। यह ऊँचा एक्सपेंस रेश्यो निवेशकों के नेट रिटर्न को कम कर सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (NIP) और पीएम गति शक्ति जैसी सरकारी पहलों से बड़ा बूस्ट मिल रहा है, जिनका मकसद रोड, रेलवे, पावर और शहरी विकास को बढ़ावा देना है। इन सरकारी प्रयासों के बावजूद, FY2027 के लिए प्राइवेट सेक्टर कैपिटल एक्सपेंडिचर में संभावित गिरावट एक मिला-जुला संकेत दे रही है। सेक्टर में नई टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज को भी अपनाया जा रहा है।
किसी एक सेक्टर पर फोकस करने वाले फंड्स में दूसरे डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स की तुलना में ज़्यादा उतार-चढ़ाव और कंसंट्रेशन रिस्क होता है। Bandhan Infrastructure Fund भी इस नियम का अपवाद नहीं है। फंड के कुछ प्रमुख होल्डिंग्स का परफॉर्मेंस भी मिला-जुला है। Bharat Heavy Electricals Ltd (BHEL), एक अहम होल्डिंग, कमज़ोर फंडामेंटल्स दिखा रही है, जिसमें पिछले 5 साल में रिटर्न ऑन इक्विटी और सेल्स ग्रोथ काफी कम रही है। टेक्निकल सिग्नल भी इसे 'Strong Sell' बता रहे हैं। वहीं, CESC को एनालिस्ट्स 'Strong Buy' रेटिंग दे रहे हैं और इसमें तेजी की उम्मीद है। Clean Science & Technology के लिए एनालिस्ट्स भविष्य में अच्छी ग्रोथ की भविष्यवाणी कर रहे हैं, लेकिन टेक्निकल इंडिकेटर्स शॉर्ट-टर्म कमजोरी और डाउनवर्ड ट्रेंड का संकेत दे रहे हैं। इन स्टॉक्स के अलग-अलग परफॉर्मेंस के कारण फंड के रिटर्न पर भी असर पड़ता है।
आगे चलकर, सरकारी सपोर्ट और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के चलते भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। Bandhan के जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स के लिए यह माहौल इन्वेस्टमेंट ग्रोथ का पोटेंशियल देता है। हालांकि, निवेशकों को सेक्टर के उतार-चढ़ाव, फंड के मुकाबले ज़्यादा एक्सपेंस रेश्यो और प्रमुख होल्डिंग्स की मिली-जुली संभावनाओं को ध्यान में रखना चाहिए। फाइनेंशियल प्लानर्स की सलाह है कि ऐसे थीमैटिक इन्वेस्टमेंट के लिए लॉन्ग-टर्म नज़रिए और पर्याप्त रिस्क टॉलरेंस की ज़रूरत होती है।