Bandhan Gilt Fund ने पिछले 3 सालों में **7.5%** का सालाना रिटर्न दर्ज किया है। यह फंड अपनी कैटेगरी में बेंचमार्क और अन्य फंडों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। फंड का कुल एसेट **₹1,892.4 करोड़** है और यह सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करता है, जिनमें क्रेडिट रिस्क नहीं होता पर ब्याज दरों का असर पड़ता है।
Detailed Coverage
Bandhan Gilt Fund ने मारी बाजी!
गिल्ट शॉर्ट और मिड-टर्म म्यूचुअल फंड कैटेगरी में Bandhan Gilt Fund का प्रदर्शन शानदार रहा है। पिछले 3 सालों में इस फंड ने 7.5% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल किया है। ACE MF के 21 जुलाई, 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, इसने अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया है। उदाहरण के लिए, इसी अवधि में ICICI Pru Gilt Fund ने 7.1% और SBI Gilt Fund ने 6.4% का रिटर्न दिया है।
बेंचमार्क को भी छोड़ा पीछे
फंड की खासियत यह है कि इसने अपने बेंचमार्क इंडेक्स को भी पीछे छोड़ा है। जहां फंड ने 3 साल में 7.5% का रिटर्न दिया, वहीं इसके बेंचमार्क इंडेक्स ने 6.7% का रिटर्न दिया, यानी 0.8% का आउटपरफॉर्मेंस। एक साल की अवधि में यह अंतर और भी बढ़ गया, जहां फंड ने बेंचमार्क के 2.0% रिटर्न की तुलना में 3.7% ज्यादा रिटर्न दिया।
फंड की मैनेजमेंट और स्ट्रैटेजी
Bandhan Gilt Fund के पास वर्तमान में ₹1,892.4 करोड़ की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) है। तुलना के लिए, ₹1,500 करोड़ से अधिक की एसेट वाले फंड्स को इस विश्लेषण में शामिल किया गया। ICICI Pru Gilt Fund ₹8,784.9 करोड़ के साथ इस कैटेगरी का सबसे बड़ा फंड है, लेकिन Bandhan फंड ने अपनी एसेट साइज के बावजूद बेहतरीन रिटर्न देने की क्षमता दिखाई है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि गिल्ट फंड केवल सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं। सरकार द्वारा समर्थित होने के कारण, इनमें कॉर्पोरेट क्रेडिट डिफॉल्ट का जोखिम लगभग न के बराबर होता है। हालांकि, ये फंड अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। जब बाजार में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो मौजूदा सरकारी बॉन्ड की कीमतें आमतौर पर गिर जाती हैं, जिससे फंड के शॉर्ट-टर्म वैल्यूएशन पर असर पड़ सकता है। इसके विपरीत, जब दरें गिरती हैं, तो बॉन्ड की कीमतें बढ़ जाती हैं। फंड का एक महीने और तीन महीने की अवधि में लगातार प्रदर्शन, जिसमें क्रमशः 1.3% और 3.3% का रिटर्न मिला, यह दर्शाता है कि यह वर्तमान में ब्याज दर चक्रों को कैसे नेविगेट कर रहा है। निवेशकों के लिए आगे की मुख्य बात यह होगी कि फंड मैनेजर भविष्य में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ब्याज दर नीति में बदलाव के जवाब में पोर्टफोलियो की अवधि को कैसे समायोजित करते हैं।
