Bandhan Gilt Fund ने अपने कैटेगरी के दूसरे फंड्स को पीछे छोड़ दिया है। अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस फंड ने 1 साल में **5.7%** का रिटर्न दिया है, जो इसे ICICI Prudential Gilt Fund और SBI Gilt Fund जैसे फंड्स से आगे रखता है। हालांकि, सरकारी गारंटी के कारण इसमें क्रेडिट रिस्क (Credit Risk) नहीं है, पर निवेशकों को ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव (Interest Rate Sensitivity) और डेट फंड्स (Debt Funds) पर लागू मौजूदा टैक्स नियमों पर ध्यान देना चाहिए।
गिल्ट फंड कैटेगरी में Bandhan Gilt Fund सबसे आगे
शॉर्ट और मिड-टर्म गिल्ट म्यूचुअल फंड कैटेगरी में Bandhan Gilt Fund ने बाजी मार ली है। अगस्त 2026 की शुरुआत तक के आंकड़ों के अनुसार, इस फंड ने पिछले 1 साल में 5.7% का रिटर्न दिया है। यह प्रदर्शन इसे ICICI Prudential Gilt Fund, जिसने 4.1% का रिटर्न दिया, और SBI Gilt Fund, जिसने इसी अवधि में 2.8% का रिटर्न दर्ज किया, जैसे बड़े प्रतिस्पर्धियों से काफी आगे रखता है। इस तुलना में उन फंड्स को शामिल किया गया है जिनकी असेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) कम से कम ₹1,500 करोड़ है।
3 साल का रिटर्न भी दमदार
सिर्फ 1 साल के आंकड़े ही नहीं, Bandhan Gilt Fund ने पिछले 3 सालों में 7.4% का रिटर्न भी दिया है। फंड ने अपने बेंचमार्क को लगातार पीछे छोड़ा है, पिछले साल 3.8% अंकों से बेहतर प्रदर्शन किया है। यह निरंतरता फंड मैनेजर द्वारा पोर्टफोलियो की ड्यूरेशन (Duration) और इंटरेस्ट रेट बेट्स (Interest Rate Bets) को सक्रिय रूप से प्रबंधित करने के प्रभाव को दर्शाती है।
गिल्ट फंड क्या होते हैं और इनमें क्या है जोखिम?
निवेशकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि गिल्ट फंड क्या होते हैं। ये फंड मुख्य रूप से सरकारी सिक्योरिटीज (Government Securities) में निवेश करते हैं। इस संरचना से क्रेडिट रिस्क (Credit Risk) खत्म हो जाता है, जिसका मतलब है कि सरकार द्वारा ब्याज या मूलधन के भुगतान में चूक का लगभग कोई खतरा नहीं है। हालांकि, ये फंड इंटरेस्ट रेट (Interest Rate) में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। जब अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बॉन्ड की कीमतें आमतौर पर गिरती हैं, जिससे फंड के नेट एसेट वैल्यू (NAV) पर दबाव पड़ सकता है। इसके विपरीत, जब दरें गिरती हैं, तो बॉन्ड की कीमतें बढ़ने लगती हैं, जिससे फंड को फायदा हो सकता है।
इस संवेदनशीलता के कारण, गिल्ट फंड का प्रदर्शन अक्सर इस बात पर निर्भर करता है कि फंड मैनेजर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ब्याज दर नीति में बदलाव का कितनी अच्छी तरह अनुमान लगाता है। ऐसे फंड में निवेश करने वाले निवेशक को फंड की यूनिट कीमत में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए, भले ही अंतर्निहित सिक्योरिटी क्रेडिट के नजरिए से सुरक्षित हो।
टैक्स का गणित भी समझना जरूरी
निवेशकों के लिए एक और महत्वपूर्ण पहलू टैक्स का नियम है। 1 अप्रैल 2023 को या उसके बाद खरीदे गए यूनिट्स के लिए, मौजूदा भारतीय टैक्स कानूनों के तहत गिल्ट फंड से होने वाली कमाई पर निवेशक की व्यक्तिगत इनकम टैक्स स्लैब दर (Income Tax Slab Rate) के अनुसार टैक्स लगेगा। यह इक्विटी फंड्स (Equity Funds) या पुराने डेट फंड स्ट्रक्चर्स (Debt Fund Structures) से अलग है, जिनमें शायद कम टैक्स दरें मिलती हों। नतीजतन, फंड का टैक्स-पश्चात रिटर्न (Post-tax Return) काफी हद तक निवेशक के व्यक्तिगत आय स्तर पर निर्भर करेगा।
आगे क्या देखना होगा?
आगे चलकर, निवेशकों के लिए मुख्य ध्यान इंटरेस्ट रेट साइकिल (Interest Rate Cycle) पर रहेगा। चूंकि गिल्ट फंड अनिवार्य रूप से इंटरेस्ट रेट पर दांव लगाते हैं, इसलिए केंद्रीय बैंक द्वारा दरों पर कोई भी टिप्पणी फंड के प्रदर्शन को प्रभावित करेगी। निवेशक आगामी मासिक फैक्ट शीट्स में फंड की औसत मैच्योरिटी प्रोफाइल (Average Maturity Profile) को भी ट्रैक कर सकते हैं ताकि यह समझा जा सके कि मैनेजर अपेक्षित ब्याज दर परिवर्तनों के मुकाबले पोर्टफोलियो को कैसे पोजिशन कर रहा है।
