Bandhan Gilt Fund का शानदार प्रदर्शन! 3 साल में **8%** का जबरदस्त CAGR, कैटेगरी में टॉप पर

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AuthorMehul Desai|Published at:
Bandhan Gilt Fund का शानदार प्रदर्शन! 3 साल में **8%** का जबरदस्त CAGR, कैटेगरी में टॉप पर

म्यूचुअल फंड की दुनिया में Bandhan Gilt Fund ने अपनी कैटेगरी में सबको पीछे छोड़ दिया है। पिछले **3 सालों** में इस फंड ने **8%** का सालाना कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दिया है, जो इसे अपने साथियों के मुकाबले काफी आगे रखता है।

8% CAGR के साथ सबसे आगे

ACE MF के 6 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, Bandhan Gilt Fund ने शॉर्ट और मिड-टर्म गिल्ट फंड कैटेगरी में शानदार परफॉर्मेंस दिखाई है। फंड का 3-साला CAGR 8.0% रहा, जो कि ICICI Prudential Gilt Fund के 7.5% और HDFC Gilt Fund के 6.8% से कहीं बेहतर है। यह तुलना ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा एसेट वाले फंड्स के बीच की गई है।

बेंचमार्क को भी पीछे छोड़ा

Bandhan Gilt Fund सिर्फ अपने प्रतिस्पर्धियों को ही नहीं, बल्कि अपने बेंचमार्क इंडेक्स को भी लगातार मात दे रहा है। पिछले 3 सालों में इसने बेंचमार्क को 1.0% से ज़्यादा रिटर्न दिया, जबकि बेंचमार्क 7.1% पर रहा। वहीं, पिछले 1 साल में फंड ने बेंचमार्क को 5.0% पीछे छोड़ा, क्योंकि इंडेक्स 2.7% पर ही रहा।

छोटी अवधि में भी दमदार

लंबी अवधि के साथ-साथ, फंड ने छोटी अवधि में भी अपनी रफ्तार बनाए रखी है। 1 महीने, 3 महीने और 1 साल में इसने क्रमशः 3.7%, 6.5% और 7.7% का रिटर्न देकर टॉप रैंक हासिल की है।

गिल्ट फंड्स और ब्याज दरें

यह जानना ज़रूरी है कि गिल्ट फंड्स, जो सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ब्याज दर की साइकिल के प्रति संवेदनशील होते हैं। जब ब्याज दरें गिरती हैं, तो मौजूदा बॉन्ड की कीमतें बढ़ती हैं, जिससे गिल्ट फंड्स को फायदा होता है। इसके विपरीत, अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो इन फंड्स के रिटर्न पर दबाव आ सकता है।

फंड का आकार और भविष्य

ICICI Prudential Gilt Fund जैसे बड़े फंड्स का एसेट साइज ₹8,784.9 करोड़ है। फंड मैनेजमेंट का आकार कैपिटल डिप्लॉयमेंट को प्रभावित कर सकता है। निवेशक फंड की ड्यूरेशन स्ट्रैटेजी और सिक्योरिटीज की क्रेडिट क्वालिटी पर भी ध्यान देते हैं। आने वाले समय में, निवेशकों को ब्याज दर नीति के फैसलों और यील्ड कर्व की चाल पर नज़र रखनी होगी, क्योंकि ये फंड्स मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर्स और सेंट्रल बैंक की नीतियों से काफी प्रभावित होते हैं।

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