बाजार के आकर्षक वैल्यूएशन को देखते हुए प्रमुख Balanced Advantage Funds (BAFs) ने अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी एक्सपोजर को बढ़ाया है। ये फंड्स भावनाओं के बजाय गणितीय मॉडल्स के आधार पर निवेश का फैसला लेते हैं।
Balanced Advantage Funds (BAFs), जिन्हें डायनामिक एसेट एलोकेशन फंड भी कहा जाता है, ने हाल ही में शेयर बाजार में निवेश की रफ्तार बढ़ाई है। HDFC Balanced Advantage Fund और ICICI Prudential Balanced Advantage Fund जैसे बड़े फंड्स ने अपना नेट इक्विटी एक्सपोजर 2 से 6 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इन फंड्स का इक्विटी एक्सपोजर अब 65% से 75% के दायरे में है, जो कि 2024 के अंत के मुकाबले एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है।
वैल्युएशन मॉडल का कमाल
शेयरों में निवेश बढ़ाने का मुख्य कारण फंड मैनेजरों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले इंटरनल वैल्युएशन मॉडल्स हैं। ट्रेडिशनल इक्विटी फंड्स के विपरीत, BAFs एक फ्लेक्सिबल मैंडेट पर काम करते हैं। ये फंड्स Nifty 50 के प्राइस-टू-अर्निंग (PE) रेशियो का इस्तेमाल करते हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, Nifty 50 का फॉरवर्ड PE रेशियो 18.1 के करीब आ गया है, जो इसके 10 साल के औसत 21.4 से काफी कम है। वैल्युएशन में आई यह गिरावट मैनेजरों को लार्ज-कैप शेयरों में खरीदारी का बेहतर मौका दे रही है।
डायनामिक स्ट्रैटेजी और इसके जोखिम
निवेशकों को यह समझना चाहिए कि यह फैसला किसी व्यक्तिगत राय पर नहीं, बल्कि पहले से तय नियमों पर आधारित है। हालांकि, बुल मार्केट के दौरान ये फंड्स कभी-कभी प्योर इक्विटी फंड्स के मुकाबले कम रिटर्न दे सकते हैं, क्योंकि इनका मॉडल बाजार के महंगा होने पर समय से पहले कर्ज (Debt) की ओर शिफ्ट हो सकता है।
ये फंड्स पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं हैं। इनमें भी बाजार की उतार-चढ़ाव का असर पड़ता है। निवेशकों को सलाह है कि वे केवल इक्विटी आंकड़ों को न देखें, बल्कि 3 से 5 साल के लंबे नजरिए से फंड के रिस्क मैनेजमेंट को परखें।
