Axis Value Fund ने पिछले एक महीने में वैल्यू म्यूचुअल फंड कैटेगरी में सबसे तगड़ा रिटर्न दिया है। फंड ने **2.3%** का रिटर्न हासिल किया है, जो इसके बेंचमार्क से काफी बेहतर है। हालांकि, 6 महीने और 1 साल के प्रदर्शन में दूसरे फंड आगे दिख रहे हैं।
Detailed Coverage
Axis Value Fund ने मारी बाजी
Axis Value Fund ने हाल के महीनों में अपने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। पिछले सिर्फ एक महीने में इस फंड ने 2.3% का ज़बरदस्त रिटर्न दिया है, जिससे यह वैल्यू ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स की लिस्ट में सबसे ऊपर आ गया है। यही नहीं, इसने अपने बेंचमार्क इंडेक्स को भी पीछे छोड़ दिया, जिसने इसी अवधि में सिर्फ 0.9% का रिटर्न दिया था। फंड की इस रणनीति ने 1.4% के बड़े अंतर से बेंचमार्क को मात दी है, जिसने सबको चौंका दिया है। यह आंकड़े 21 जुलाई, 2026 तक की जानकारी के अनुसार हैं, और इसमें ₹1,500 करोड़ या उससे अधिक एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाले फंड्स को शामिल किया गया है।
लंबी अवधि में कौन है किंग?
हालांकि, एक महीने का प्रदर्शन सिर्फ हालिया तेजी दिखाता है। जब लंबी अवधि की बात आती है, तो परफॉरमेंस की तस्वीर बदल जाती है। उदाहरण के लिए, 6 महीने की अवधि में Aditya Birla SL Value Fund 9.6% रिटर्न के साथ सबसे आगे है। वहीं, 1 साल की बात करें तो DSP Value Fund 10.9% रिटर्न के साथ टॉप पर है। म्यूचुअल फंड की दुनिया में यह उतार-चढ़ाव आम बात है, क्योंकि अलग-अलग मार्केट साइकिल में अलग-अलग स्टॉक पिकिंग स्ट्रैटेजी काम आती है।
3 साल का कैसा है रिकॉर्ड?
निवेशक अक्सर शॉर्ट-टर्म के फायदों को लॉन्ग-टर्म की कंसिस्टेंसी से तौलते हैं। Axis Value Fund ने 3 साल की अवधि में भी 17.9% का दमदार रिटर्न दिया है। इस मामले में DSP Value Fund भी 17.1% रिटर्न के साथ कड़ी टक्कर दे रहा है। यह दिखाता है कि जहां शॉर्ट-टर्म रैंकिंग बदलती रहती है, वहीं कुछ फंड मल्टी-ईयर साइकल में भी अपनी जगह बनाए हुए हैं।
फंड साइज और अन्य फैक्टर्स
फंड का साइज भी एक अहम फैक्टर है। बड़े फंड्स को लिक्विडिटी की अलग चुनौतियां झेलनी पड़ सकती हैं। वैल्यू फंड्स में, UTI Value Fund सबसे बड़े कॉर्पस (₹9,439.6 करोड़) के साथ लिस्ट में है, हालांकि इसका एक महीने का रिटर्न 1.7% रहा। HDFC Value Fund और Aditya Birla SL Value Fund का एक महीने का रिटर्न 2.0% रहा और वे भी रैंकिंग में ऊपर हैं। फंड चुनते समय, निवेशक आमतौर पर एक्सपेंस रेशियो, पोर्टफोलियो और फंड मैनेजर के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हैं, क्योंकि पिछला प्रदर्शन भविष्य की गारंटी नहीं है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि फंड का निवेश का तरीका अलग-अलग मार्केट फेज़ में कितना कंसिस्टेंट रहता है, न कि सिर्फ एक महीने की रैंकिंग।
