Axis Overnight Fund ने पिछले एक महीने में **0.4%** का रिटर्न देकर बड़े डेट फंड्स की कैटेगरी में टॉप पर अपनी जगह बनाई है। हालांकि, इन फंड्स के रिटर्न आमतौर पर लगभग एक जैसे ही होते हैं, लेकिन निवेशकों को एक्सपेंस रेशियो और लिक्विडिटी पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए।
क्या हुआ?
29 जून 2026 को खत्म हुए एक महीने के दौरान, Axis Overnight Fund ओवरनाइट म्यूचुअल फंड कैटेगरी में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली स्कीम बनकर उभरी है। इसने 0.4% का रिटर्न दिया है। फंड भले ही टॉप पर रहा हो, लेकिन Tata Overnight Fund और DSP Overnight Fund जैसे दूसरे फंड्स का प्रदर्शन भी इसके करीब था, जिन्होंने 0.4% का ही रिटर्न दर्ज किया। यह डेटा उन बड़े फंड्स पर केंद्रित है जिनकी असेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा है। यह शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी चाहने वाले संस्थागत (institutional) और रिटेल निवेशकों के लिए सेक्टर के प्रदर्शन को दर्शाता है।
ओवरनाइट फंड की स्ट्रैटेजी को समझें
ओवरनाइट फंड डेट म्यूचुअल फंड की एक खास कैटेगरी है जो सिर्फ एक दिन की मैच्योरिटी वाले सिक्योरिटीज में निवेश करती है। इसका मुख्य मकसद अतिरिक्त नकदी को सुरक्षित रखना होता है। ये फंड लगभग पूरी तरह से ओवरनाइट इंस्ट्रूमेंट्स, जैसे कि Tri-Party Repo (TREPS) या शॉर्ट-टर्म सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं, इसलिए इनमें जोखिम सभी डेट म्यूचुअल फंड कैटेगरी में सबसे कम माना जाता है।
रिटर्न अक्सर एक जैसे क्यों होते हैं?
निवेशकों को अक्सर यह देखकर हैरानी होती है कि ओवरनाइट फंड्स में रिटर्न लगभग एक जैसा क्यों होता है। यह कोई संयोग नहीं है। इस कैटेगरी के सभी फंड्स का निवेश का तरीका एक ही होता है - एक दिन की मैच्योरिटी वाले इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश। ऐसे में, मार्केट में चल रही ओवरनाइट लेंडिंग रेट्स ही रिटर्न को तय करती हैं।
जब कोई एक फंड थोड़ा ज़्यादा रिटर्न दिखाता है, तो यह अक्सर निवेश के समय या फंड मैनेजर द्वारा नकदी को संभालने के मामूली अंतर के कारण होता है। इसी वजह से, निवेशक ओवरनाइट फंड्स को ज़्यादा रिटर्न (alpha) कमाने का जरिया नहीं मानते, बल्कि इन्हें सेविंग्स बैंक अकाउंट के एक विकल्प के तौर पर देखते हैं जहां अतिरिक्त पैसा पार्क किया जा सके।
फंड के साइज़ की भूमिका
इस कैटेगरी के बड़े फंड्स में, असेट्स का साइज़ ऑपरेशनल स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होता है। उदाहरण के लिए, SBI Overnight Fund अभी भी ₹27,025 करोड़ के कॉर्पस के साथ इंडस्ट्री में सबसे आगे है। बड़े फंड्स अक्सर बेहतर लिक्विडिटी प्रदान करते हैं, जिससे निवेशक फंड की स्थिरता को प्रभावित किए बिना अपने पैसे को जल्दी निकाल सकते हैं। इन स्कीम्स के बीच चयन करते समय, AUM साइज़ निवेशकों के लिए ट्रैक करने का एक उपयोगी कारक हो सकता है, क्योंकि यह अक्सर संस्थागत भरोसा और लिक्विडिटी को दर्शाता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
ओवरनाइट फंड्स की तुलना करते समय, मासिक रिटर्न के छोटे-छोटे अंतरों से हटकर स्ट्रक्चरल खर्चों पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि ग्रॉस रिटर्न अक्सर एक जैसे होते हैं, निवेशक को मिलने वाला 'नेट' रिटर्न एक्सपेंस रेशियो से काफी प्रभावित होता है। कम एक्सपेंस रेशियो सीधे तौर पर निवेशक के लिए यील्ड को बढ़ाता है।
इसके अलावा, निवेशकों को इन बातों पर भी नज़र रखनी चाहिए:
- एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio): कम खर्च का मतलब है कि ज़्यादा पैसा निवेशक के पास रहता है।
- एग्जिट लोड (Exit Loads): सुनिश्चित करें कि तुरंत निकासी के लिए कोई छिपा हुआ चार्ज न हो, क्योंकि लिक्विडिटी इन फंड्स का मुख्य उद्देश्य है।
- फंड हाउस का ट्रैक रिकॉर्ड (Fund House Track Record): डेट फंड्स के लिए मैनेजमेंट में निरंतरता और ऑपरेशनल कुशलता महत्वपूर्ण है।
- बेंचमार्क एलाइनमेंट (Benchmark Alignment): जांचें कि फंड लंबी अवधि, जैसे कि एक-वर्षीय या तीन-वर्षीय होराइजन पर, अपने बेंचमार्क को लगातार ट्रैक करता है या नहीं, ताकि स्थिर निष्पादन सुनिश्चित हो सके।
