Axis Overnight Fund ने पिछले एक महीने में **0.4%** का ज़बरदस्त रिटर्न दिया है। यह फंड ओवरनाइट म्यूचुअल फंड कैटेगरी में टॉप परफॉर्मर्स में से एक बन गया है। **₹8,200 करोड़** से ज़्यादा की असेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाला यह ओपन-एंडेड डेट स्कीम अल्ट्रा-शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टमेंट पर फोकस करती है। हालांकि इसे कम जोखिम वाला प्रोडक्ट माना जाता है, पर ध्यान रखें कि इसके रिटर्न पर मनी मार्केट की चाल का असर होता है, जो बैंक डिपॉजिट के फिक्स्ड इंटरेस्ट से अलग है।
ओवरनाइट फंड्स में सबसे आगे
Axis Overnight Fund ने ओवरनाइट म्यूचुअल फंड कैटेगरी में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई है। पिछले एक महीने में इस फंड ने 0.4% का शानदार रिटर्न दिया है। यह फंड ऐसे डेट सिक्योरिटीज में निवेश करता है जो एक दिन में मैच्योर हो जाती हैं। बड़े साइज़ वाले फंड्स में अपनी जगह बनाए रखते हुए, इसने UTI Overnight Fund और Nippon India Overnight Fund जैसे अपने प्रतिस्पर्धियों को भी पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने इसी अवधि में समान रिटर्न पोस्ट किया है।
₹8,216 करोड़ का एसेट मैनेजमेंट (AUM)
30 जून 2026 तक, इस फंड के पास लगभग ₹8,216 करोड़ की असेट है। यह इस सेगमेंट में फंड को एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाता है। ओवरनाइट फंड का मुख्य उद्देश्य 24 घंटे के भीतर मैच्योर होने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में पैसा लगाकर हाई लिक्विडिटी और स्टेबिलिटी प्रदान करना है। क्योंकि निवेश की अवधि बहुत कम होती है, इन फंड्स में दूसरे डेट फंड्स की तुलना में इंटरेस्ट रेट रिस्क और क्रेडिट रिस्क बहुत कम माना जाता है।
परफॉरमेंस को समझना
जहां 0.4% का मासिक रिटर्न शॉर्ट-टर्म परफॉरमेंस को दिखाता है, वहीं इस कैटेगरी के निवेशक अक्सर लंबी अवधि में कंसिस्टेंसी के आधार पर फंड्स का मूल्यांकन करते हैं। फंड का बेंचमार्क NIFTY 1D Rate Index है। फाइनेंशियल डेटा के अनुसार, फंड ने एक साल और तीन साल की अवधि में लगातार अच्छा परफॉरमेंस बनाए रखा है, जो इसे एक लो-वोलैटिलिटी इन्वेस्टमेंट ऑप्शन के रूप में स्थापित करता है।
निवेशकों के लिए, नेट रिटर्न में निवेश की लागत एक महत्वपूर्ण फैक्टर है। फंड का एक्सपेंस रेशियो, जो एसेट मैनेजमेंट कंपनी द्वारा फंड को मैनेज करने के लिए लिया जाने वाला शुल्क है, यहाँ भूमिका निभाता है। 31 जुलाई 2026 तक, रेगुलर प्लान का एक्सपेंस रेशियो लगभग 0.13% था, जबकि डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो लगभग 0.09% था। कम एक्सपेंस रेशियो से निवेशक को ज़्यादा रिटर्न मिलता है।
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
हालांकि ओवरनाइट फंड्स को कम जोखिम वाला माना जाता है, लेकिन वे पूरी तरह से जोखिम-मुक्त नहीं हैं। इनका परफॉरमेंस मनी मार्केट में उपलब्ध लिक्विडिटी और मौजूदा इंटरेस्ट रेट एनवायरनमेंट पर निर्भर करता है, जो सेंट्रल बैंक की नीतियों से प्रभावित होता है। इन्हें अक्सर सेविंग्स अकाउंट या लिक्विड फंड्स के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ये गारंटीड रिटर्न नहीं देते। एक दिन में मैच्योर होने वाले सिक्योरिटीज की क्रेडिट क्वालिटी भी फंड की स्टेबिलिटी को प्रभावित करने वाला एक फैक्टर बनी हुई है।
इस कैटेगरी को देखने वाले निवेशक आमतौर पर फंड के रिटर्न की कंसिस्टेंसी को उसके बेंचमार्क से मिलाते हैं और एक्सपेंस रेशियो की स्टेबिलिटी पर नज़र रखते हैं। चूंकि इन फंड्स में कोई एग्जिट लोड नहीं है, ये सरप्लस कैश को शॉर्ट-टर्म के लिए रखने की फ्लेक्सिबिलिटी प्रदान करते हैं। जैसे-जैसे फंड अपने ऑपरेशन्स जारी रखता है, भविष्य में फंड की लो-रिस्क प्रोफाइल बनाए रखने और बदलते मार्केट कंडीशन्स में NIFTY 1D Rate Index को प्रभावी ढंग से ट्रैक करने की क्षमता पर नज़र रहेगी।
