Axis Mutual Fund का लार्ज और मिड कैप फंड 2018 में लॉन्च होने के बाद से सालाना औसतन **17.33%** का रिटर्न दे रहा है। फंड का फोकस लार्ज-कैप की स्टेबिलिटी और मिड-कैप की ग्रोथ पर है। फंड मैनेजमेंट ने हाल ही में अपने निवेश वाली कंपनियों की संख्या 96 से घटाकर 81 कर दी है, ताकि हाई-कन्विक्शन आइडियाज़ पर फोकस बढ़ाया जा सके।
दमदार प्रदर्शन का राज
Axis Mutual Fund का Axis Large & Mid Cap Fund, 2018 में अपनी शुरुआत से ही निवेशकों को लगातार अच्छा रिटर्न दे रहा है। फंड ने अब तक 17.33% का कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल किया है। यह रिटर्न फंड के उस लंबे समय के स्ट्रैटेजी को दिखाता है, जिसमें वह स्टेबल लार्ज-कैप कंपनियों के साथ-साथ तेजी से बढ़ने वाली मिड-कैप कंपनियों में निवेश करके मार्केट के उतार-चढ़ाव से निपटने की कोशिश करता है।
पोर्टफोलियो में बड़े बदलाव
30 जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, फंड के रेगुलर प्लान-ग्रोथ ऑप्शन ने पिछले तीन सालों में 15.08% का CAGR और पिछले एक साल में 3.61% का रिटर्न दिया है। अगर किसी निवेशक ने शुरुआत में ₹10,000 का निवेश किया होता, तो आज यह राशि लगभग ₹33,800 हो जाती। हाल ही में, फंड मैनेजमेंट ने अपने पोर्टफोलियो को और बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। दिसंबर 2025 में फंड में 96 डोमेस्टिक इक्विटी होल्डिंग्स थीं, जिन्हें जून 2026 तक घटाकर 81 कर दिया गया है। इसका मतलब है कि फंड अब कम कंपनियों में, लेकिन ज्यादा भरोसे वाले यानी हाई-कन्विक्शन स्टॉक्स में पैसा लगा रहा है।
सेक्टर पर फोकस और इकोनॉमिक आउटलुक
फंड का वर्तमान फोकस भारत के मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल सेक्टर पर है, खासकर ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स जैसे क्षेत्रों में। Axis Mutual Fund के इक्विटी हेड, श्रेयश देवलकर का कहना है कि फंड का निवेश कई मजबूत फैक्टर्स पर आधारित है, जैसे इकोनॉमी का बढ़ता फॉर्मलाइजेशन, प्राइवेट सेक्टर का बढ़ता निवेश और कंजम्पशन में बढ़ोतरी। इसके अलावा, डोमेस्टिक मार्केट से परे डाइवर्सिफाई करने के लिए फंड ने ग्लोबल इक्विटी में भी अपना निवेश बढ़ाया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे थीम शामिल हैं।
इंडस्ट्री का हाल और रिस्क
भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में हाल के समय में काफी ग्रोथ देखी गई है। AMFI के अनुसार, मई 2026 तक कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹81.58 लाख करोड़ तक पहुंच गया था। इसमें लार्ज और मिड-कैप कैटेगरी का हिस्सा लगभग ₹3.40 लाख करोड़ है। हालांकि फंड अपने डुअल-कैप अप्रोच से रिस्क को बैलेंस करने की कोशिश करता है, लेकिन निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि मिड-कैप स्टॉक्स में लार्ज-कैप की तुलना में ज्यादा वोलेटिलिटी (उतार-चढ़ाव) होती है। इसके अलावा, फंड का प्रदर्शन चुनिंदा सेक्टर्स की कंपनियों के सफल एग्जीक्यूशन और डोमेस्टिक व इंटरनेशनल मार्केट की इकोनॉमिक स्टेबिलिटी पर निर्भर करेगा। कंसंट्रेटेड पोर्टफोलियो होने के कारण, फंड का प्रदर्शन अब उसके टॉप होल्डिंग्स के नतीजों से ज्यादा प्रभावित होगा। भविष्य में यह देखना अहम होगा कि क्या यह कंसंट्रेटेड अप्रोच मार्केट बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन जारी रखता है और फंड अपने चुने हुए सेक्टर्स में वैल्यूएशन रिस्क को कैसे मैनेज करता है।
