भारतीय निवेशकों ने अगस्त में SIP के जरिए रिकॉर्ड **₹32,297 करोड़** का निवेश किया है। हालांकि, हालिया आंकड़े बताते हैं कि **3 साल** के रिटर्न में काफी अंतर है, जहां मिड-कैप फंड्स ने लार्ज-कैप स्कीमों को पीछे छोड़ दिया है।
सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के प्रति भारतीय निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। अगस्त में मासिक इनफ्लो ₹32,297 करोड़ के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। लेकिन आंकड़ों की गहराई में जाने पर पता चलता है कि आपका रिटर्न इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कौन सा फंड चुना है।
कैटेगरी का बड़ा अंतर
पिछले 3 सालों के प्रदर्शन को देखें तो मिड-कैप फंड्स 12.59% के औसत रिटर्न के साथ सबसे आगे रहे हैं। इसके उलट, लार्ज-कैप फंड्स का प्रदर्शन सुस्त रहा और उन्होंने औसतन सिर्फ 5.90% का रिटर्न दिया है। यह स्पष्ट करता है कि केवल बाजार में बने रहना काफी नहीं है, सही कैटेगरी का चुनाव भी जरूरी है।
टाइम होराइजन का महत्व
जब हम 5 साल की लंबी अवधि की बात करते हैं, तो तस्वीर बदल जाती है। मिड-कैप फंड्स ने 17.29% और स्मॉल-कैप फंड्स ने 16.75% का औसत रिटर्न दिया है। इससे यह साफ है कि निवेश की अवधि जितनी लंबी होगी, बाजार के उतार-चढ़ाव का असर उतना ही कम होगा और बेहतर ग्रोथ की संभावना बढ़ेगी।
फंड सिलेक्शन की चुनौती
निवेशक अक्सर कैटेगरी एवरेज को देखकर फैसला ले लेते हैं, जो गलत साबित हो सकता है। उदाहरण के लिए, फ्लेक्सी-कैप कैटेगरी ने 3 साल में औसतन 7.78% रिटर्न दिया, लेकिन ICICI Prudential Flexi Cap Fund ने 12.99% का शानदार रिटर्न बना कर दिया। इसी तरह, स्मॉल-कैप सेगमेंट में Bank of India Small Cap Fund का रिटर्न 18.52% रहा, जबकि कैटेगरी का औसत 11.73% था।
बेंचमार्क से तुलना
बाजार के बेंचमार्क की बात करें, तो Nifty 500 TRI ने 3 साल में 7.63% रिटर्न दिया, जबकि Nifty 50 TRI सिर्फ 4.55% पर सिमट गया। निवेशकों को केवल कैटेगरी का नाम नहीं, बल्कि फंड मैनेजर का ट्रैक रिकॉर्ड, एक्सपेंस रेशियो और अपने लक्ष्यों के साथ निवेश की अवधि को गहराई से जांचना चाहिए।
