आर्बिट्राज फंड्स (Arbitrage Funds) में हालिया नेट एसेट वैल्यू (NAV) में आई अस्थिरता अब सामान्य हो गई है। यह अस्थिरता 3 अगस्त 2026 को लागू हुए नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के कारण आई थी। शुरुआती दौर में इस सिस्टम की वजह से फंड्स के वैल्यू में लगभग 0.5% की बढ़ोतरी देखी गई थी, लेकिन अब बाजार के आंकड़ों के अनुसार फंड्स की वैल्यू वापस सामान्य हो गई है। यह एक तकनीकी बदलाव का असर था, न कि आर्बिट्राज रणनीति में किसी बड़ी खराबी का।
क्लोजिंग ऑक्शन से कैसे हुई NAV में हलचल?
नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) मैकेनिज्म के लागू होने के बाद आर्बिट्राज फंड्स (Arbitrage Funds) की नेट एसेट वैल्यू (NAV) में आई अस्थिरता अब सामान्य हो गई है। यह बदलाव इसी महीने 3 अगस्त 2026 से फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग के लिए योग्य सभी स्टॉक्स पर लागू हुआ था। इस बदलाव ने शुरू में फंड्स की दैनिक वैल्यू की गणना को लेकर कुछ भ्रम पैदा कर दिया था।
पहले, इन स्टॉक्स की क्लोजिंग प्राइस वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) का इस्तेमाल करके तय की जाती थी, जो ट्रेड के आखिरी 30 मिनट का औसत होता था। लेकिन, CAS फ्रेमवर्क के तहत, दिन के अंत में एक विशेष ऑक्शन प्रक्रिया का उपयोग करके प्राइस डिस्कवरी को बेहतर बनाने का लक्ष्य है। चूँकि आर्बिट्राज फंड्स कैश मार्केट और फ्यूचर मार्केट के बीच के प्राइस डिफरेंस पर निर्भर करते हैं, इस नए प्राइसिंग मेथड में ट्रांजिशन के कारण एक अस्थायी मिसमैच हो गया। इसके चलते कई फंड्स की NAV में एक दिन के लिए लगभग 0.5% का स्पाइक आया, जो कि कुछ घंटों में ही एक महीने की सामान्य कमाई के बराबर था। यह विसंगति अगले तीन ट्रेडिंग दिनों में ठीक हो गई, क्योंकि बाजार ने नए नियमों के अनुसार खुद को एडजस्ट कर लिया।
अब क्या है स्थिति?
17 अगस्त 2026 तक के बाजार के आंकड़ों से पता चलता है कि यह उतार-चढ़ाव कम हो गया है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह अस्थिरता पूरी तरह से वैल्यूएशन का असर थी। यह इसलिए हुआ क्योंकि ट्रांजिशन के दौरान कैश मार्केट क्लोजिंग प्राइस और फ्यूचर मार्केट प्राइस के बीच थोड़े समय के लिए मिसअलाइनमेंट हुआ था, न कि आर्बिट्राज रणनीति की विफलता के कारण। ये फंड्स बहुत कम जोखिम के साथ कैश और डेरिवेटिव सेगमेंट के बीच के प्राइस डिफरेंस को भुनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, और इन स्ट्रैटेजी का मुख्य कार्य अपरिवर्तित है।
SEBI का क्या है कहना?
SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने पुष्टि की है कि CAS फ्रेमवर्क एक स्थायी सुधार है, जिसका उद्देश्य मार्केट क्लोजिंग प्रोसेस को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना है। हालांकि रेगुलेटर इस प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए फीडबैक की समीक्षा कर रहा है, लेकिन यह फ्रेमवर्क जारी रहने की उम्मीद है। निवेशकों के लिए, इसका मतलब है कि हालिया NAV में उतार-चढ़ाव नए नियमों के लागू होने से जुड़ी एक तकनीकी समस्या थी, न कि फंड्स में कोई संरचनात्मक समस्या।
आगे क्या है जोखिम?
इस सामान्यीकरण के बावजूद, निवेशकों को कुछ छोटे जोखिमों से सावधान रहना चाहिए। क्लोजिंग ऑक्शन की सफलता संस्थागत खिलाड़ियों की पर्याप्त भागीदारी पर निर्भर करती है। यदि अंतिम ऑक्शन सेशन के दौरान लिक्विडिटी कम रहती है, तो इससे कभी-कभी प्राइसिंग में विसंगतियां हो सकती हैं, हालांकि ये उम्मीद से कम समय के लिए होंगी। इसके अतिरिक्त, फंड मैनेजर्स को नए प्राइस-डिटरमिनेशन प्रोसेस के तहत अपने ट्रेड्स को पूरी तरह से निष्पादित करना सीखने में कुछ छोटे ऑपरेशनल हर्डल्स का सामना करना पड़ सकता है। निवेशकों के लिए आगे सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि फंड हाउस नीलामी के दौरान कैश मार्केट में अपने एग्जीक्यूशन को कितनी आसानी से मैनेज करते हैं, खासकर बाजार की उच्च अस्थिरता वाले दिनों में।
